क्रिकेट मैच खेलना एक बात है और अपने प्रतिद्वंद्वी से बेहतर खेलना दूसरी बात है । और क्रिकेट मैच जीतना तो एकदम ही अलग बात है। कभी-कभी आप बेहतर खेलकर भी मैच हार जाते हैं। आम तौर पर क्रिकेट के तीन departments होते हैं बल्लेबाजी , गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण। आधुनिक क्रिकेट में एक और विभाग है और वो है अंपायरिंग।
ख़राब अंपायरिंग किसी टीम की मेहनत पर पानी फेर सकती है। ऐसा ही कुछ हुआ था 2008 में जब सिडनी में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट चल रहा था। 1998 में शरजाह में ख़राब अंपायरिग हुई थी। ये फ़ेहरिस्त काफी लंबी लेकिन हम यहां ख़राब अंपायरिंग के पांच उदाहरण पेश कर रहे हैं।
1-साउथ अफ़्रीका vs भारत- 2007
बारिश की वजह से ये मैच 31 ओवर का कर दिया गया था। अजित अगरकर ने वान वैक और जाक कालिस को ज़ीरो पर आउट कर पवैलियन भेज दिया था। साउथ अफ़्रीका आठ रन पर दो विकेट गवां चुका था और उसकी हालत पतली थी। अगले ओवर की पहली बॉल डि विलियर्स के बैट का किनारा लेकर पहली स्लिप पर गई जहां सचिन तेंदुलकर ने कैच पकड़ लिया लेकिन अंपायर अलीम डर ने आउट नहीं दिया। माइक पर सचिन को ये कहते सुना गया कि ”उनसे पूछो कि बॉल क्या ज़मीन पर लगी? भारतीय खिलाड़ियों ने अंपायर से बहस की लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। रिप्ले में साफ था कि बॉल ने बैट का बाहरी किनारा लिया था।
ये फ़ैसला मंहगा नहीं पड़ा क्योंकि विलियर्स 13वें ओवर में आउट हो गए और भारत 6 विकेट से मैच जीत गया। साउथ अफ़्रीका को अंतिम तीन ओवर में 21 रन बनाने थे और अगर डि विलियर्स टिक जाते तो नतीजा उल्टा भी हो सकता था।