नयी दिल्ली: विराट कोहली के पास 'कुछ अच्छे लोग' थे जिन्हें उन्होंने चैंपियन टीम के रुप में बदल कर रख दिया। इस काम में उनके सबसे भरोसेमंद अश्विन ने बहुत मदद की। इसके पहले टीम इंडिया की साख के संकट से गुज़र रही थी।
कहते हैं "नेता वो होता है जिसे न सिर्फ़ राह मालूम होती है बल्कि राह दिखाना भी जानता हो" और कोहली ने इस बात को सार्थक करते हुए टीम को विश्व की नंबर एक टीम बना दिया।
कोहली का सबसे कारगर और ख़तरनाक हथियार अश्विन रहे हैं जिन्होंने हमेशा वक़्त पड़ने पर कसौटी पर ख़रा होकर दिखाया और एक के बाद एक मैच जिताए।
ICC ने अश्विन को वर्ष का सर्वश्रेष्ठ टेस्ट क्रिकेटर घोषित किया है और उम्मीद है कि इसके साथ ही 'अगले कपिल देव' की तलाश भी ख़त्म हो गई।
एक तरफ जहां टीम इंडिया (टेस्ट) ने साल भर अपने प्रशंसकों में ढेरों ख़ुशियां बांटी वही खेल प्रशासन (BCCI) ज़बरदस्त बदलाव के दौर से गुज़रा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त जस्टिस लोढा कमेटी की सिफ़ारिशों से भूचाल जैसा आ गया। BCCI जहां लोढा समिति की रिपोर्ट से लगी आग को बुझाने में लगी रही वही क्रिकेटर्स ने जीत को मानों अपनी आदत ही बना दी। टीम इंडिया ने इस साल 12 में से 9 मैच जीते।
टीम इंडिया ने सबसे पहले वेस्ट इंडीज़ को वेस्ट इंडीज़ में ही 2-0 से हराया फिर घर में न्यूज़ीलैंड को 3-0 से शिकस्त दी। विरोधी टीम को रौंदने का सिलसिला यही नही थमा और कोहली एण्ड कंपनी ने इंग्लैंड को भी 4-0 से धो डाला। कप्तान कोहली ने इस साल 1213 रन बनाए जिसमें तीन सिरीज़ में उनके तीन दोहरे शतक शामिल हैं। अश्विन ने भी सीज़न में 72 विकेट चटकाए और 612 रन ठोके।
इसके बावजूद देखना ये होगा कि टीम इंडिया अनिल कुंबले की निगरानी में क्या विदेशी सरज़मीं पर भी ये कमाल जारी रख पाएगी? लेकिन इंग्लैंड विश्वस्तरीय स्पिनर के अभाव में भारत में बेरंग नज़र आई। उधर ऑस्ट्रेलिया भी बदलाव के दौर से गुज़र रही है। ऑस्ट्रेलिया साउथ अफ़्रीका से हारी जिसकी साल भर पहले ही इंडिया ने जमकर धुलाई की थी।
बहरहाल, विदेशी ज़मीन पर इंडिया क्या करेगी ये तो वक़्त आने पर ही पता चलेगा लेकिन कोहली किस स्तर के बल्लेबाज़ बन चुके हैं ये अब बहस का विषय रहा ही नही है। कोहली वह पांच साल से मैच विनर हैं लेकिन जिस सहज तरीके से उन्होंने कप्तानी की ज़िम्मेदारी निभाई है, वो भी कम क़ाबिल-ए-तारीफ़ नही है।