मुंबई क्रिकेट की गलियों से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो प्रतिभा, संघर्ष और अफसोस से भरी हुई है। कभी मुंबई का विवियन रिचर्ड्स कहलाने वाले अनिल गुरव अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनकी अधूरी कहानी आज भी क्रिकेट प्रेमियों को भावुक कर जाती है। अनिल गुरव का 31 मार्च को नालासोपारा स्थित उनके घर पर निधन हो गया। उनके जाने से मुंबई क्रिकेट जगत में शोक की लहर है।
आचरेकर सर के पसंदीदा शिष्य
अनिल गुरव को उनके दोस्त “मुंबई का विवियन रिचर्ड्स” कहते थे, क्योंकि उनकी बल्लेबाजी का अंदाज दिग्गज विवियन रिचर्ड्स जैसा था। खासतौर पर उनका स्क्वायर कट और लेग साइड पर खेलने की क्षमता शानदार मानी जाती थी।
गुरव, महान कोच रमाकांत आचरेकर के शुरुआती शिष्यों में से एक थे। बताया जाता है कि आचरेकर सर उन्हें इतना पसंद करते थे कि वह सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली जैसे खिलाड़ियों को भी उनके खेल को देखने के लिए नेट्स पर ले जाते थे। मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के क्यूरेटर नदीम मेमन के मुताबिक, आचरेकर सर सचिन और बाकी खिलाड़ियों को गुरव को खेलते देखने के लिए कहते थे। वह ऐसे खिलाड़ी थे, जिनसे बहुत कुछ सीखा जा सकता था।
अपार प्रतिभा होने के बावजूद गुरव कभी सीनियर स्तर तक नहीं पहुंच सके। उन्होंने अंडर-16 और अंडर-19 स्तर पर खेला, साथ ही सस्सानियन क्रिकेट क्लब और कामथ मेमोरियल के लिए भी खेलते रहे, लेकिन मुंबई की सीनियर टीम में जगह नहीं बना पाए।
सचिन से खास कनेक्शन
एक दिलचस्प बात यह भी सामने आती है कि स्कूल के दिनों में गुरव ने अपना बल्ला सचिन तेंदुलकर को दिया था, जिससे सचिन ने अपने करियर का पहला शतक लगाया था। ऐसा माना जाता है कि पारिवारिक समस्याओं और गलत संगत के चलते गुरव का करियर पटरी से उतर गया। उनके भाई से जुड़े विवादों के कारण परिवार को पुलिस की परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके अलावा, गुरव शराब की लत में भी पड़ गए और धीरे-धीरे क्रिकेट से दूर होते चले गए।