नयी दिल्ली: डेविस कप के पूर्व कप्तान आनंद अमृतराज को लगता है कि लिएंडर पेस और महेश भूपति के बीच कड़वे रिश्ता बयां करती ताजा घटना नयी नहीं है लेकिन पुरानी कहानी का नया अध्याय है और इसके लिये दोनों खिलाड़ी जिम्मेदार हैं।
भूपति से पहले डेविस कप टीम के पूर्व गैर खिलाड़ी कप्तान ने कहा कि कप्तान को पेस को स्पष्ट कर देना चाहिए था कि वह अंतिम चार खिलाडि़यों में शामिल नहीं है और अगर पेस को खेलने वाली टीम में अपना स्थान सुनिश्चित करने का भरोसा नहीं था तो उसे बेंगलुरू नहीं आना चाहिए था।
पेस ने भूपति पर अपने स्थान का बेजा इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और उन्हें टीम से बाहर कर दिया। जबकि कप्तान ने कहा कि उन्होंने कभी भी उन्हें अंतिम चार में स्थान का वादा नहीं किया था और रिज़र्व के तौर पर बेंगलुरू नहीं आने का विकल्प भी दिया था।
अमृतराज ने पीटीआई से बातचीत में कहा, यह पुरानी कहानी का नया अध्याय है। यह दुखद है कि यह विवाद फिर से पैदा हुआ। इसमें दोनों पक्षों की गलती है। महेश ने इसे निपटाने का गलत तरीका अपनाया। महेश ने लिएंडर को ईमेल क्यों नहीं भेजा और स्पष्ट रूप से क्यों नहीं बताया कि तुम अंतिम चार में शामिल नहीं हो। अगर दो
महीने पहले ही उसने रोहन को खिलाने का फैसला कर लिया था तो इस खिलाड़ी (लिएंडर) को क्यों लटका कर रखा जाये?
अमृतराज ने कहा, क्या वह चार एकल खिलाडि़यों को चुनकर उज्बेकिस्तानी खिलाडि़यों को बेवकूफ बनाना चाहता था? कोई भी इससे बेवकूफ नहीं बनता। और पेस को बेंगलुरू नहीं आना चाहिए था, अगर वह खेलने के बारे में सुनिश्चित नहीं था।
उन्होंने कहा, इस सारी असंमजस की स्थिति से बचा जा सकता था। महेश को सिर्फ इतना करना था कि वह लिएंडर को एक ईमेल भेजता कि उसे अंतिम चार में शामिल नहीं किया जा रहा है और एक प्रति एआईटीए को भेज देता।
पेस मुकाबले के बीच में ही बेंगलुरू छोड़कर चले गये, जिस कदम पर भूपति ने कहा कि यह ताबूत में आखिरी कील थी। कप्तान को भी यह बात पसंद नहीं आयी कि पेस ने अपने गैग आदेश के बावजूद मीडिया से बात की।
हालांकि अमृतराज को लगता है कि पेस के पास बेंगलुरू में रूकने का कोई कारण नहीं था।
उन्होंने कहा, वहां रूकने का कोई मतलब नहीं था? टीम पहले दिन ही 2-0 से आगे थी। बेहतर यही रहा कि वह अमेरिका चला गया और अगले टूर्नामेंट के लिये परिस्थितियों से सांमजंस्य बिठाने लगा। सोमवार को जाने का कोई मतलब नहीं था। उसे खुद को शर्मसार नहीं करवाना चाहिए था। उसे बेंगलुरू नहीं आना चाहिए था।