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संजीता चानू ने खुद को बताया निर्दोष, निलंबन को देंगी चुनौती

 Edited By: India TV Sports Desk
 Published : Jun 01, 2018 01:43 pm IST,  Updated : Jun 01, 2018 01:43 pm IST

संजीता को हालांकि भारतीय भारोत्तोलन महासंघ (आईडब्ल्यूएलएफ) के अध्यक्ष सहदेव यादव का समर्थन हासिल है।

संजीता चानू- India TV Hindi
संजीता चानू

नयी दिल्ली: भारतीय वेटलिफ्टर संजीता चानू ने खुद को निर्दोष करार देते हुए कहा कि वह डोप परीक्षण में कथित तौर पर नाकाम रहने के लिये उन पर लगाये गये अस्थायी निलंबन को चुनौती देगी।

संजीता ने कहा,‘‘मैं निर्दोष हूं। मैंने कोई प्रतिबंधित दवाई नहीं ली। मैं राष्ट्रीय महासंघ की मदद से इसे चुनौती दूंगी।’’ 

गोल्डकोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में महिलाओं के 53 किग्रा भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीतने वाली संजीता को टेस्टोस्टेरोन के लिये पाजीटिव पाये जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय भारोत्तोलन महासंघ (आईडब्ल्यूएफ) ने निलंबित कर दिया था। उनका नमूना पिछले साल नवंबर में अमेरिका के एनाहीम में विश्व चैंपियनशिप से पहले प्रतियोगिता से इतर लिया गया था।

संजीता को हालांकि भारतीय भारोत्तोलन महासंघ (आईडब्ल्यूएलएफ) के अध्यक्ष सहदेव यादव का समर्थन हासिल है जिन्होंने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि यह मणिपुरी निर्दोष है। यादव ने कहा,‘‘यह हमारी समझ से परे हैं कि डोप परिणाम में इतनी देर क्यों की गयी। नमूना लिये जाने के बाद उसने नवंबर में विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और इसके बाद उसने अप्रैल में गोल्डकोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता। हम इसके खिलाफ लड़ेंगे कि ऐसा क्यों हो रहा है।’’ 

उन्होंने कहा,‘‘किसी भी मामले में हम ‘बी’नमूने की जांच के लिये लिखते हैं। परिणाम मिलने के बाद हम (अंतरराष्ट्रीय महासंघ में) मामला रखने के लिये शीर्ष वकील की सेवाएं लेंगे। मुझे पक्का विश्वास है कि संजीता ने कोई प्रतिबंधित दवाई नहीं ली। मुझे पूरा विश्वास है कि हम उसे निर्दोष साबित करने में सफल रहेंगे।’’ 

यादव ने इसके साथ ही कहा कि संजीता ने राष्ट्रमंडल खेलों में जो स्वर्ण पदक जीता है उसके छीने जाने का खतरा नहीं है। संजीता ने 53 किग्रा में कुल 192 किग्रा भार उठाकर सोने का तमगा जीता था। उन्होंने 2014 ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में 48 किग्रा में स्वर्ण पदक हासिल किया था। 

अगर संजीता का ‘बी’नमूना भी पाजीटिव पाया जाता है तो उन पर चार साल का प्रतिबंध लग सकता है। संजीता ने पिछले साल 53 किग्रा में विश्व चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था जिसमें वह 13वें स्थान पर रही थी। 

एशियाई खेलों की तैयारी के लिये 24 साल की इस खिलाड़ी को नौ मई को खेल मंत्रालय के लक्ष्य ओलंपिक पोडियम योजना (टाप्स) में शामिल किया गया था लेकिन डोपिंग मामले में नाम आने के बाद उन्हें इस योजना से हटाया जा सकता है। 

इस मामले से भारतीय भारोत्तोलन को करारा झटका लगा है जिसके भारोत्तोलकों ने हाल में अच्छा प्रदर्शन किया। इसमें विश्व चैम्पियनशिप में 48 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीतने वाली मीराबाई चानू भी शामिल हैं। भारतीय भारोत्तोलकों के लिए साल 2016 डोप मुक्त रहा था लेकिन 2017 में एक भारोत्तोलक सुशीला पंवार को अंतरराष्ट्रीय महासंघ के परीक्षण में पाजीटिव पाया गया था। संजीता का मामला इस साल का पहला डोप पाजीटिव परिणाम है। 

अंतराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के दबाव में हाल ही में आईडब्ल्यूएफ ने टोक्यो ओलंपिक में ऐसे देशों का कोटा सीमित करने का फैसला किया है जहां डोपिंग के अधिक मामले मिले हैं। संजीता के मामले से पहले 2008 से अब तक 12 भारतीय भारोत्तोलकों को अंतरराष्ट्रीय संघ द्वारा किए गए डोपिंग परीक्षणों में पाजीटिव पाया गया है। 

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