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IAS अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के कंटेम्प्ट मामले में नया मोड़, वादी का केस लड़ने से इनकार, भूमि से हटाया कब्जा

 Edited By: Rituraj Tripathi
 Published : Sep 28, 2026 12:56 pm IST,  Updated : Sep 28, 2026 12:56 pm IST

IAS अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के कंटेम्प्ट मामले में नया मोड़ सामने आ गया है। वहीं वादी दयानंद मिश्रा ने सरकारी भूमि से अपना 30 साल पुराना कब्जा हटा लिया है।

Durga Shakti Nagpal- India TV Hindi
दुर्गा शक्ति नागपाल Image Source : X@DURGASHAKTIIAS

गोंडा: IAS अधिकारी और  देवीपाटन मंडल की मंडलायुक्त  दुर्गा शक्ति नागपाल की कंटेम्प्ट कार्यवाही को लेकर चर्चित हुए 30 साल पुराने नजूल भूमि प्रकरण में अब नया मोड़ सामने आया है। सरकारी भूमि विवाद में वादी दयानंद मिश्रा ने न्यायालय के समक्ष शपथ-पत्र देकर आगे पैरवी न करने और कार्यवाही समाप्त किए जाने का अनुरोध किया है। 

इससे भी अहम यह कि दयानंद मिश्रा ने सरकारी भूमि से अपना 30 साल पुराना कब्जा भी स्वयं हटा लिया है। लंबे समय से न्यायालय में लंबित इस प्रकरण में घटनाक्रम अब शासकीय भूमि की सुरक्षा और उसके निर्धारित उपयोग की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।

क्या है मामला?

यह मामला गोंडा में आयुक्त कार्यालय एवं भवन के लिए आरक्षित नजूल भूखंड संख्या 514, 515, 524 और 525 से संबंधित है। प्रकरण वर्ष 1997 से न्यायालय में लंबित था। वर्ष 2008 में स्थगन आदेश पारित होने के बाद भी सरकारी भूमि से जुड़े मामले में विधिक पैरवी जारी रही। सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने के अभियान के दौरान यह पुराना प्रकरण प्रशासन के संज्ञान में आया।

कंटेम्प्ट के बीच बदली तस्वीर

कथित फोन कॉल से संबंधित घटनाक्रम के बाद मामला हाईकोर्ट में कंटेम्प्ट कार्यवाही तक पहुंचा। इस न्यायिक प्रकरण में अंतिम निर्णय अभी लंबित है। इसी बीच मूल नजूल भूमि विवाद में वादी की ओर से आगे मुकदमा न लड़ने का अनुरोध सामने आया है। न्यायालय में शपथ-पत्र दिए जाने के साथ ही मौके से कब्जा हटाए जाने ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है।

तीन दशक पुरानी फाइल पर कमिश्नर की नजर

सरकारी भूमि से जुड़े इस पुराने प्रकरण की जानकारी सामने आने के बाद मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने मामले की लगातार समीक्षा की। अभिलेखों और न्यायालयीन स्थिति की पड़ताल कराते हुए संबंधित अधिकारियों को सरकारी पक्ष मजबूती से रखने और शासकीय हितों की रक्षा के लिए प्रभावी विधिक पैरवी के निर्देश दिए गए। जांच के दौरान भूमि पर अवैध विद्यालय संचालित होने की बात भी सामने आई थी। प्रशासन ने मौके की स्थिति की पड़ताल कराई तो वर्तमान में वहां कोई भी विद्यार्थी और शिक्षक नहीं मिला। इसके बाद भूमि की मौके पर स्थिति की भी निगरानी की गई।

कोर्ट में पीछे हटे, मौके से भी कब्जा हटाया

प्रकरण में वादी/अतिक्रमणकारी दयानन्द मिश्र, एडवोकेट, निवासी ग्राम छावनी सरकार आनंदपुरी, सिविल लाइन, गोंडा की ओर से न्यायालय में शपथ-पत्र प्रस्तुत किया गया है। इसमें वाद में आगे पैरवी न करने तथा कार्यवाही समाप्त किए जाने का अनुरोध किया गया है।

मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि संबंधित पक्ष ने न्यायालय में कानूनी पैरवी से पीछे हटने के साथ ही मौके से अपना कब्जा भी हटा लिया। यानी तीन दशक से लंबित विवाद में अब अदालत की कार्यवाही के स्तर पर भी बदलाव आया और जमीन की भौतिक स्थिति भी बदल गई।

1997 से चली फाइल, 2026 में कब्जे से बाहर हुई जमीन

वर्ष 1997 में शुरू हुए इस विवाद को न्यायालयीन प्रक्रिया में करीब तीन दशक हो चुके हैं। 2008 के स्थगन आदेश के बाद भी मामला लंबित रहा। अब 2026 में वादी के शपथ-पत्र और मौके से कब्जा हटने के बाद प्रशासन के सामने इन भूखंडों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी है।

आयुक्त कार्यालय एवं भवन के लिए आरक्षित इन भूखंडों को अब सुरक्षित रखते हुए निर्धारित शासकीय प्रयोजन में उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।

पुराने मामलों की भी हो रही समीक्षा

शासकीय भूमि के संरक्षण और अवैध कब्जों से मुक्ति के लिए प्रशासन स्तर पर पुराने एवं लंबित मामलों की समीक्षा की जा रही है। इसी क्रम में तीन दशक पुराने इस नजूल भूमि प्रकरण की फाइल फिर खुली और न्यायालयीन स्थिति के साथ मौके की वास्तविक स्थिति भी परखी गई। 

मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की निगरानी में सरकारी भूमि से जुड़े इस प्रकरण में हुई कार्रवाई के बाद अब पूरा फोकस जमीन की सुरक्षा और उसके शासकीय उपयोग पर है।

IAS अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने इस मामले में क्या कहा?

IAS अधिकारी और देवीपाटन मंडल की मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने इस मामले में कहा, "माननीय मुख्यमंत्री जी की मंशानुरूप शासकीय भूमि का संरक्षण व जनहित में उपयोग सर्वोच्च प्राथमिकता है। लगभग 30 वर्षों से लंबित इस प्रकरण में अंततः सत्य की विजय हुई और शासकीय भूमि कब्जामुक्त हुई। संबंधित पक्ष ने न्यायालय में आगे पैरवी न करने का अनुरोध करते हुए मौके से भी कब्जा हटा लिया है। अब भूमि को सुरक्षित रखते हुए निर्धारित शासकीय प्रयोजन में उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।”

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