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गुरु पुर्णिमा को लेकर सीएम योगी की पाती, बोले - 'गुरुजनों का सदैव करें स्मरण'

 Written By: Amar Deep @amardeepmau
 Published : Jul 27, 2026 07:58 am IST,  Updated : Jul 27, 2026 07:58 am IST

सीएम योगी ने सोमवार को प्रदेशवासियों के नाम पत्र लिखा। इसमें उन्होंने गुरुओं की विशेषता का जिक्र किया। इसके साथ ही उन्होंने विभिन्न परंपराओं में गुरु पुर्णिमा की महत्ता का भी जिक्र किया।

योगी की पाती।- India TV Hindi
योगी की पाती। Image Source : INDIA TV

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने गुरु पूर्णिमा की विशेषता को बताते हुए प्रदेशवासियों के नाम पत्र लिखा है। अपने पत्र में सीएम योगी ने गुरु पुर्णिमा की कई परंपराओं में विशेषता का उल्लेख किया। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश में गुरुओं, शिक्षकों के लिए चलाई रही विभिन्न योजनाओं का जिक्र किया, जिससे उन्हें लाभान्वित किया जा रहा है। वहीं सीएम योगी ने प्रदेशवासियों से यह भी अपील की कि अपने गुरुजनों का सदैव स्मरण रखें। उनके दिए आदर्शों को जीवन में उतारें। इससे आपका विकास सुनिश्चित होगा तथा विकसित प्रदेश का मार्ग भी तभी प्रशस्त होगा।

'गुरुजनों के प्रति सम्मान प्रकट करने का अवसर'

सीएम योगी ने अपने पत्र में लिखा, "भारतीय मनीषा एवं सनातन संस्कृति में गुरु को साक्षात् परम ब्रह्म माना गया है। विक्रम संवत् 2083 की आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा (29 जुलाई, 2026) को गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व हम सबके लिए गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सम्मान प्रकट करने का अवसर है। सनातन परंपरा में यह पर्व महर्षि वेदव्यास की स्मृति में 'व्यास पूर्णिमा' के रूप में मनाया जाता है। बौद्ध परंपरा में यह भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश और धर्मचक्र प्रवर्तन का स्मृति-दिवस है। जैन परंपरा में इसका संबंध गौतम स्वामी के ज्ञान-दीक्षा प्रसंग से हैं। सिख परंपरा में भी गुरु-वाणी सर्वोपरि है। इसीलिए गुरु पूर्णिमा गुरु-शिष्य परंपरा एवं आध्यात्मिक चेतना का सार्वकालिक उत्सव है।"

'गुरु के सम्मान से होती है समाज की उन्नति'

उन्होंने आगे लिखा, "प्रभु श्रीराम ने गुरु वशिष्ठ से ज्ञान और संस्कार प्राप्त कर आदर्श जीवन की मर्यादाओं को आत्मसात किया। भगवान श्रीकृष्ण ने महर्षि सांदीपनि के आश्रम में रहकर ज्ञान प्राप्त किया। कठोपनिषद् में नचिकेता ने यमराज के समक्ष क्षणिक सुख और वैभव का नहीं, अपितु 'श्रेयं अर्थात् सत्य एवं आत्मज्ञान का मार्ग चुना। जहां गुरु का सम्मान होता है, वही समाज उन्नति करता है। इसी भावना के अनुरूप हमारी सरकार ने विगत नौ वर्षों में शिक्षक सम्मान एवं उनके सशक्तीकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। पारदर्शी भर्ती, समयबद्ध सेवा-सुविधाएं, आधुनिक डिजिटल संसाधन तथा निरंतर क्षमता संवर्धन सुनिश्चित कर हमने अपने गुरुजनों को ऐसा समर्थ परिवेश देने का प्रयास किया है, जहां वे ज्ञान, संस्कार और राष्ट्रनिर्माण की अपनी भूमिका का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सके।"

'शिक्षकों का कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता'

सीएम योगी ने लिखा, "शिक्षकों का सम्मान और उनका कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। इसी उद्देश्य से 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना आरंभ की गई है। इसका लाभ बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा से जुड़े प्रदेश के 60 लाख शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी एवं उनके आश्रित परिजन प्राप्त कर रहे हैं। उच्च शिक्षा विभाग के राज्य एवं निजी विश्वविद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों, स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के 7.50 लाख से अधिक शिक्षकों तथा उनके आश्रित परिजनों को भी इसकी परिधि में लामा गया है तथा शीघ्र ही 2.50 लाख से अधिक शिक्षणेत्तर कर्मचारी एवं उनके आश्रित परिजन भी इस योजना से लाभान्वित होंगे। साथ ही, शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा बीमा कवर भी प्रदान किया जा रहा है।"

'गुरुजनों का सदैव रखें स्मरण'

सीएम योगी ने आखिरी में लिखा, "वास्तव में, गुरु शिक्षा ही नहीं देते, जीवन को दिशा भी देते हैं। गुरु स्वयं ज्ञान का आलोक हैं, जो शिष्य को अज्ञानरूपी तम से निकालकर सत्य, संस्कार और प्रकाश के पथ पर अग्रसर करते हैं। मेरा आप सबसे विशेष आग्रह है कि अपने गुरुजनों का सदैव स्मरण रखें। उनके दिए आदर्शों को जीवन में उतारें। इससे आपका विकास सुनिश्चित होगा तथा विकसित प्रदेश का मार्ग भी तभी प्रशस्त होगा।"

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