Viral Video : मुंबई के बोरीवली वेस्ट में साई बाबा नगर, जैन मंदिर के पास 82 वर्षीय मनसुख काका रोजाना सुबह से शाम तक लगभग 12 घंटे फुटपाथ पर घर पर बने फरसान, खाखरा, चकली और नमकीन बेचते हैं। कोविड-19 महामारी में उनकी और उनके बेटे की नौकरी चली गई। अब वे दिन में औसतन 300 रुपये कमाकर परिवार का गुजारा चलाते हैं। उनकी बहन घर पर ताजा स्नैक्स बनाती हैं और काका उन्हें बेचते हैं। वायरल वीडियो में उनकी मुस्कान, मेहनत और आत्मसम्मान ने लाखों लोगों को छू लिया। वीडियो को इंस्टाग्राम पर मुंबई की कंटेंट क्रिएटर आराधना चटर्जी ने शेयर किया है।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @storiesbyaradhana नामक हैंडल से शेयर किया गया है। क्रिएटर के अनुसार, 'मनसुख काका ने दशकों तक साड़ी की दुकान में विक्रेता के रूप में काम किया। हालांकि, महामारी ने अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी कर दीं। इस दौरान बीमार पड़ने के बाद, खबरों के अनुसार उनकी नौकरी चली गई। इस स्थिति ने उनके परिवार को भी प्रभावित किया, क्योंकि उनके बेटे को उनके ठीक होने तक उनकी देखभाल करने के लिए काम से छुट्टी लेनी पड़ी। आज भी काका अपने सड़क किनारे वाले स्टॉल पर लगभग 12 घंटे प्रतिदिन बिताते हैं। वे जो स्नैक्स बेचते हैं, वे बाहर के आपूर्तिकर्ताओं से नहीं मंगवाए जाते, बल्कि परिवार के सदस्यों की मदद से घर पर ही तैयार किए जाते हैं। उनकी बहन हर दिन ताज़ा फरसान बनाती हैं, जिसे सावधानीपूर्वक पैक करके स्टॉल पर बिक्री के लिए लाया जाता है।'
82 की उम्र में कमाल का जज्बा
वायरल वीडियो में मनसुख काका को स्नैक्स के पैकेट करीने से सजाते और ग्राहकों का गर्मजोशी से मुस्कुराते हुए अभिवादन करते देखा जा सकता है। दर्शकों को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली बात थी उनका हिसाब-किताब रखने का समर्पण। वीडियो में उन्हें एक छोटी डायरी में हर लेन-देन और खर्च को ध्यान से लिखते हुए देखा जा सकता है, जो उनकी उम्र के बावजूद उनके अनुशासन और समर्पण को दर्शाता है। हालांकि इस काम में लंबे घंटे और काफी मेहनत लगती है, लेकिन आर्थिक लाभ सीमित ही रहता है। चटर्जी के अनुसार, मनसुख काका अच्छे दिनों में लगभग 300 रुपये कमाते हैं। फिर भी, उनके दृढ़ संकल्प और काम के प्रति लगन ने ऑनलाइन हजारों लोगों को प्रेरित किया है। वीडियो साझा करते हुए चटर्जी ने लिखा, 'इस उम्र में भी मनसुख काका पूरी लगन और मेहनत से अपना स्टॉल चलाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, आइए हम सब मिलकर उनका समर्थन करें।'
रिटायरमेंट को लेकर कही बड़ी बात
काका कहते हैं, 'रिटायरमेंट उम्र का नहीं, स्थिति का नाम है। जब तक सांस है, मेहनत जारी रहेगी।' उन्होंने कभी साड़ी की दुकान पर काम किया, लेकिन आज बिना पेंशन या मजबूत आर्थिक सहारे के जिंदगी लड़ रहे हैं। उनकी कहानी उन करोड़ों भारतीय बुजुर्गों की सच्चाई है, जिनके लिए बुढ़ापा आराम का नहीं, संघर्ष का समय है।
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
इस वीडियो को देखने के बाद कई यूजर्स ने इस पर प्रतिक्रियाएं दी हैं। एक यूजर ने लिखा कि, 'क्या आप मुझे बता सकते हैं कि वह इन्हें कहां बेचते हैं? मैं वहां जाकर खरीद लूंगा।'
दूसरे यूजर ने लिखा कि, 'क्या किसी ने गौर किया है कि उन्होंने अपनी शर्ट अंदर tucked कर रखी है? वे बेहद पेशेवर और दृढ़ निश्चयी दिखते हैं। बहुत बढ़िया, उन्हें सलाम।'
तीसरे यूजर ने लिखा कि, 'मैंने उन्हें देखा है। वह सचमुच बहुत प्यारे हैं! अगर आप लोग कर सकते हैं तो कृपया उससे कुछ खरीदें?'
चौथे यूजर ने लिखा कि, 'पुरुषों का समर्थन करने वाली महिलाएं और अपने परिवारों के लिए कड़ी मेहनत करने वाले पुरुष एक ही फ्रेम में!'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।