Bengaluru Airport Video : बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसे देखकर लोग पूछ रहे हैं, 'एयरपोर्ट है या रेलवे स्टेशन?' यह वीडियो मूल रूप से एक डिजिटल क्रिएटर द्वारा इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया था, और इसने हवाई अड्डों पर लोगों के व्यवहार और अपनी उड़ानों का इंतजार कर रहे यात्रियों के लिए आरामदायक विश्राम स्थलों की कमी के बारे में एक बहस छेड़ दी है।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर the_crazywomania नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वायरल वीडियो की शुरुआत टर्मिनल 2 के शानदार इंटीरियर को दिखाते हुए होती है, जिसे अक्सर देश के सबसे खूबसूरत एयरपोर्ट में से एक माना जाता है। यह टर्मिनल अपनी प्रकृति से प्रेरित सजावट के लिए प्रसिद्ध है। शुरुआती कुछ सेकंड में ही टर्मिनल की सुंदरता को दर्शाया गया है, जिसमें हरी-भरी हरियाली, लटकते पौधे, बांस की संरचनाएं, फव्वारे और खुले स्थान शामिल हैं, जो हवाई अड्डे को एक शांत वातावरण प्रदान करते हैं। कुछ ही देर में हालात बदल गए। वीडियो में फिर प्रस्थान क्षेत्र का दृश्य दिखाया गया, जहां कई यात्री सीमेंट से बने बैठने के ढांचों पर लेटे हुए और अपने सिर बैग और बैकपैक पर रखे आराम करते नजर आए। कुछ लोग पेड़ों की छांव में भी लेटे हुए थे। क्लिप पर लिखा था, 'तुम जितना भी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनवा लो, हम तो देसी ही रहेंगे।' यह संदेश हवाई अड्डे की विश्व स्तरीय सुंदरता और प्रतीक्षा क्षेत्र के अंदर के दृश्यों के बीच हास्यास्पद विरोधाभास दर्शाता है। पोस्ट के कैप्शन में क्रिएटर ने स्पष्ट किया, 'हम बस देसी हैं… एयरपोर्ट जैसा भी हो… किसी भी व्यक्ति का चेहरा नहीं दिखाया गया… इसलिए धर्म के बारे में अटकलें लगाना बंद करो… और अपने घटिया विचार मेरे कमेंट सेक्शन में मत डालो!!'
यूजर्स के बीच छिड़ी बहस
इस वीडियो को देखने के बाद यूजर्स ने अपने—अपने विचार व्यक्त किए। किसी ने लिखा कि, 'यह चांगी, कुआलालंपुर और इंचियोन की तस्वीर है।'
दूसरे ने लिखा कि, '6-7000 रुपये में टिकट लेना और मजदूरों की तरह ज़मीन पर सोना। कितना घटिया व्यवहार है।' तीसरे यूजर ने लिखा कि, 'इसमें देसीपन जैसी कोई बात नहीं है, इसे कहते हैं सिविक सें की भावना का अभाव।'
एक और ने लिखा कि, 'आप अंतरराष्ट्रीय स्तर के हवाई अड्डे बनाते हैं, हां। क्या हमारे पास प्रतीक्षा क्षेत्र हैं? क्या पारगमन यात्रियों के लिए विश्राम स्थल हैं? बुजुर्ग बच्चे, दिव्यांग, हम सभी को उन असुविधाजनक सीटों में बैठना पड़ता है... व्यवस्था पर सवाल मत उठाओ, हमेशा दूसरों को ही दोषी ठहराओ।'
एक यूजर ने लिखा कि, 'क्या आप भारत से बाहर गए हैं?… वहां भी लोग लंबी उड़ानों के दौरान हवाई अड्डे पर सोते हैं। हवाई अड्डे के अंदर फर्श पर भी सोते हैं, लेकिन चलिए देसी लोगों को नीचा दिखाने और खुद को कूल साबित करने के लिए रील बनाते हैं।'
एक और ने लिखा कि, 'भारतीयों के प्रति यह नफरत बंद करो, हवाई यात्रा बहुत तनावपूर्ण होती है – मैंने यह चांगी, कुआलालंपुर और इंचियोन में भी देखा है। हो सकता है कि सबके पास लाउंज में जाने के लिए क्रेडिट कार्ड न हो, या हो सकता है कि हवाई अड्डे भीड़भाड़ वाले हों! वे बस शांति से आराम कर रहे हैं उन्हें अकेला छोड़ दो!!'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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