हर घर में अभिभावक अक्सर इस बात को लेकर हैरान होते हैं कि बच्चे घंटों-घंटों तक टीवी या मोबाइल में कार्टून कैसे देखते रहते हैं। उन्हें स्पोर्ट्स, फिल्म या सीरियल आदि क्यों कार्टून के मुकाबले पसंद नहीं होते, वह कार्टून में कैसे ज्यादा आनंद पाते हैं। इसका जवाब, मलेशियन ऑनलाइन जर्नल ऑफ एजुकेशनल टेक्नोलॉजी में छपी एक रिपोर्ट में मिलता है। जिसमें लिखा है कि कार्टून खासतौर से बच्चों के विकासशील मस्तिष्क का ध्यान अपनी तरफ खींचने के लिए ही डिजाइन होते हैं। जानें इसके पीछे का विज्ञान क्या है। मनोवैज्ञानिकों और रिसर्चर्स ने बच्चों के कार्टून के लिए इस प्यार के पीछे कई वजहें बताई हैं।
कार्टून के चमकीले रंग और सीन करते हैं आकर्षित
दरअसल, बच्चों का दिमाग नई और अत्यधिक उत्तेजक चीजों की तरफ तेजी से रिएक्ट करने वाला होता है। इसीलिए कार्टून के चमकीले रंग, तेज रफ्तार वाले सीन और तेज आवाजें, असली दुनिया की धीमी गति के मुकाबले बच्चों का ध्यान बहुत अच्छे तरीके से अपनी ओर खींचते हैं।
भावनाओं को समझने का होता है माध्यम
मलेशियन ऑनलाइन जर्नल ऑफ एजुकेशनल टेक्नोलॉजी में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, कार्टून, बच्चों को तमाम कठिन भावनाओं को समझने का एक सुरक्षित दायरा देते हैं। जब कोई कार्टून कैरेक्टर खुशी, डर या गुस्से का अनुभव करता है, तो साथ में बच्चा भी सुरक्षित महसूस करते हुए उन भावनाओं को व्यक्त करना और पहचानना सीखता है।
काल्पनिक दुनिया और वास्तविकता का मेल
ये भी है कि 5 साल तक की उम्र वाले बच्चे काल्पनिक और वास्तविकता के बीच ज्यादा अंतर नहीं करने में सक्षम नहीं होते हैं। उनको मैजिक और बोलने वाले जानवर एकदम सच लगते हैं। कार्टून उनकी इस कल्पना को पर्दे पर साकार करता है।
कार्टून में बच्चों की आजादी आती है पसंद
असल जीवन में बच्चों का टाइम टेबल बड़े तय करते हैं, लेकिन कार्टून में अक्सर बच्चे या जानवर ही हावी रहते हैं जो समाज और भौतिकी के नियमों को तोड़ते हैं। यह आजादी उनको काफी आकर्षित करती है।
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