बेंगलुरु की नम्मा मेट्रो में यात्रियों का अनुशासन और सिविक सेंस एक बार फिर चर्चा में है। इंस्टाग्राम पर शबीना मसूद नाम की एक महिला ने मेट्रो यात्रा के अपने अनुभव साझा करते हुए यात्रियों के व्यवस्थित व्यवहार की खुलकर तारीफ की है। उनके वायरल वीडियो में लिखा गया है-‘बेंगलुरु मेट्रो का अनुशासन सराहनीय है। ’
इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @lifewithshabinamasood नामक हैंडल से शेयर किया गया है। शबीना मसूद ने वीडियो में बताया, “बेंगलुरु मेट्रो की सबसे अच्छी बात यह है कि यहां के लोग ट्रेन में बहुत अनुशासित तरीके से चढ़ते और उतरते हैं। महिलाओं को देखते ही वे तुरंत सीट ऑफर कर देते हैं। और आपको अपने बैग में रखी चीजों की चिंता करने की जरूरत नहीं, क्योंकि यहां जेबकतरी नहीं होती।” उन्होंने बोर्डिंग और डीबोर्डिंग के दौरान कतारों का सम्मान, महिलाओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार और सुरक्षा के अनुभव को यात्रा को सुखद बनाने वाले प्रमुख कारण बताया।
यूजर्स भी हुए इंप्रेस
यह पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई। कई यूजर्स ने उनके अनुभव से सहमति जताई। एक यूजर ने लिखा, “यहां लोग सच में कतार का सम्मान करते हैं।”
दूसरे ने कहा, “महिलाओं को सीट ऑफर करना अच्छा जेस्चर है।”
कई लोगों ने टिप्पणी की, “यह बहुत सही है” और “अच्छा नागरिक बोध बहुत फर्क पैदा करता है।”
इन प्रतिक्रियाओं से साफ है कि मेट्रो में अनुशासन बनाए रखने वाले छोटे-छोटे व्यवहार यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाते हैं।
नम्मा मेट्रो सोशल मीडिया पर सुपरहिट
बेंगलुरु मेट्रो यानी नम्मा मेट्रो शहर के लाखों यात्रियों के लिए मुख्य परिवहन साधन बन चुकी है। पीक आवर्स में भी जब भीड़ बढ़ती है, तब व्यवस्थित कतारें और एक-दूसरे के प्रति सम्मान यात्रा को सहज रखते हैं। महिलाओं को सीट ऑफर करने की आदत विशेष रूप से उल्लेखनीय है, क्योंकि यह सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के लिए सुरक्षा और आराम की भावना बढ़ाती है। शबीना ने जेबकतरी न होने का भी जिक्र किया, जो कई शहरों की मेट्रो या लोकल ट्रेनों में आम समस्या होती है। इससे यात्रियों में सुरक्षा का भरोसा पैदा होता है। यह प्रशंसा ऐसे समय में आई है जब सार्वजनिक परिवहन में सिविक सेंस पर अक्सर बहस होती रहती है। कई शहरों में कतार तोड़ने, सीट न छोड़ने या अन्य असुविधाओं की शिकायतें आती रहती हैं। बेंगलुरु मेट्रो में यात्रियों द्वारा स्वयं अनुशासन बनाए रखने की मिसाल सकारात्मक संदेश देती है। मेट्रो प्रशासन भी समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाता है ताकि साझा जगहों पर जिम्मेदार व्यवहार सुनिश्चित हो।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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