जिम्बाब्वे से भारत आकर रह रहे कलुम्बा म्वाले ने सोशल मीडिया पर अपना अनुभव साझा करते हुए उन सात चीजों की सूची बनाई है, जिन्होंने उन्हें भारत में आश्चर्यचकित कर दिया। उन्होंने लिखा कि वे एक बात की उम्मीद लेकर आए थे, लेकिन यहां ‘एक बिल्कुल अलग दुनिया’ मिल गई। उनका इंस्टाग्राम पोस्ट और वीडियो वायरल हो रहा है। भोजन और शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य सेवा और अंतरराष्ट्रीय छात्रों तक, उन्होंने सात ऐसी बातें बताईं जिन्होंने भारत में जीवन के प्रति उनकी सोच को बदल दिया।
इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया वीडियो
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @kalumba_mwale नामक हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो को 'जिम्बाब्वे में जो मुझे सामान्य लगता था, भारत में रहने से पहले वह सब बदल गया' कैप्शन के शेयर किया गया। पहली बात शिक्षा की थी। उन्होंने बताया कि जिम्बाब्वे में यूनिवर्सिटी में दाखिला बेहद प्रतिस्पर्धी लगता है, जबकि भारत में सैकड़ों यूनिवर्सिटी और कॉलेज उपलब्ध हैं। अलग-अलग बजट और क्षेत्रों में विकल्प मौजूद हैं। दूसरी आश्चर्यजनक बात अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या रही। म्वाले ने कहा कि उनके यूनिवर्सिटी में दर्जनों देशों के छात्र मिलते हैं। जिम्बाब्वे में इतने विविध देशों के छात्रों से मिलना उतना आम नहीं था। भारत शिक्षा के लिए कई देशों के युवाओं को आकर्षित कर रहा है, यह उनके लिए नई बात थी।
भोजन की वैरायटी पर भी की बात
उनके अनुसार खाने की विविधता तीसरा बड़ा सरप्राइज थी। जिम्बाब्वे में सदजा, चावल और स्टू जैसी डिशें आम हैं। भारत में क्षेत्रीय व्यंजनों और स्वादों की भरमार है। 'आप लगभग हर दिन कुछ बिल्कुल अलग खा सकते हैं और फिर भी भारतीय व्यंजनों के बारे में पूरी तरह से जान नहीं पाएंगे।' वे बताते हैं कि, मसाले का मतलब भी बदल गया। जिम्बाब्वे में मसाला अक्सर सिर्फ ज्यादा मिर्च डालने को कहते हैं, जबकि भारत में यह स्वादों, खुशबू और सामग्री का पूरा ब्रह्मांड है। बिना मसाले का खाना अधूरा लगता है।
मेडिकल सर्विस भी अतुलनीय
कलुम्बा के मुताबिक, स्वास्थ्य सेवा चौथा पहलू था। म्वाले के अनुसार जिम्बाब्वे में विशेष चिकित्सा सुविधाएं सीमित या महंगी हो सकती हैं। भारत मेडिकल टूरिज्म का बड़ा केंद्र बन चुका है, जहां दूसरे देशों से लोग इलाज के लिए आते हैं। यह उनके लिए आश्चर्य की बात थी।
शिक्षा और नजरिया
वे बताते हैं कि, पांचवां और सबसे महत्वपूर्ण सबक अवसरों से जुड़ा था। आमतौर पर विदेश में पढ़ाई या जीवन बनाने की बात आती है तो यूके, यूएस, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया का नाम लिया जाता है। उन्होंने लिखा कि, 'यहां रहने से मुझे यह समझ आया कि विदेशों में अवसर केवल पश्चिमी देशों तक ही सीमित नहीं हैं।' भारत ने उन्हें सिखाया कि पश्चिमी देशों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। छठा और सातवां पहलू कुल मिलाकर उनके नजरिए का बदलाव और रोजमर्रा की जिंदगी का अनुभव था। उन्होंने कहा कि वे एक चीज की उम्मीद लेकर आए, लेकिन पूरी तरह अलग दुनिया खोज ली। वे बोले कि, 'मैं जिम्बाब्वे से एक ही उम्मीद लेकर आया था… और अंत में मुझे एक बिलकुल अलग ही दुनिया देखने को मिली।'
यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं
पोस्ट पर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं आईं। कई यूजर्स ने उनका स्वागत किया और अनुभव सकारात्मक रहने की शुभकामनाएं दीं। एक जर्मन छात्र ने दिल्ली में अफ्रीकी छात्रों से मिलने की खुशी जताई। कुछ ने कहा कि भारत में सब कुछ मिल जाता है, भले ही थोड़ी अराजकता हो। एक ने पूछा कि क्या उन्होंने दोस्तों को भारत आने के लिए प्रेरित किया। एक यूजर ने लिखा कि, 'मुझे खुशी है कि आप यहां अच्छा समय बिता रहे हैं और उन चीजों को देख पा रहे हैं जिनके बारे में बाहरी लोग सोचते भी नहीं हैं। आशा है आपका अनुभव सकारात्मक बना रहेगा।'
दिल्ली में पढ़ रहे एक जर्मन छात्र ने बताया, 'दिल्ली में एक जर्मन छात्र होने के नाते, मुझे अफ्रीकी छात्रों से मिलना बहुत अच्छा लगता है , खासकर यहां जिम्बाब्वे के कई छात्र हैं। इसलिए, मैं भी आप सभी से मिलने के लिए उतना ही उत्साहित हूं।'
तीसरे यूजर ने लिखा कि, 'कुछ भारतीयों ने हमारे देश को हल्के में ले लिया है।'
चौथे यूजर ने लिखा कि, 'सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यहां कोई नस्लवाद नहीं है। आशा है आपका समय अच्छा बीतेगा।'
गौरतलब है कि, जिम्बाब्वे के इसी शख्स ने भारत के एजुकेशन सिस्टम से इंप्रेस होकर वीडियो शेयर किया था जिसमें खूबियां गिनाईं थीं।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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