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पूर्वी चाड में पानी को लेकर दो गुटों में हिंसक झड़प, कम से कम 42 लोगों की मौत

 Edited By: Dharmendra Kumar Mishra
 Published : Apr 27, 2026 03:04 pm IST,  Updated : Apr 27, 2026 03:13 pm IST

चाड के पूर्वी हिस्से में दो पक्षों के बीच पानी के मुद्दे पर हुई हिंसक झड़प में कम से कम 42 लोगों की मौत हो गई है। सेना के हस्तक्षेप के बाद स्थिति अब नियंत्रण में है।

चाड में पानी की किल्लत (फाइल फोटो)- India TV Hindi
चाड में पानी की किल्लत (फाइल फोटो) Image Source : AP

एन’जामेना (चाड): चाड के पूर्वी हिस्से में दो पक्षों के बीच पानी के मुद्दे पर हिंसक झड़प हो गई। इसमें कम से कम 42 लोगों की मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि यह झगड़ा क्षेत्र में पानी के एक स्रोत पर अधिकारों को लेकर हुई। यह झड़प बाद में प्रतिशोध की श्रृंखला में बदल गई। चाड के उप-प्रधानमंत्री ने रविवार देर रात यह जानकारी दी।

चाड के डिप्टी पीएम ने कहा-स्थिति नियंत्रण में

चाड के उप-प्रधानमंत्री लिमाने महामत ने शनिवार को सूडान की सीमा के पास वादी फिरा प्रांत के इगोटे गांव का दौरा करते हुए बताया कि इस झड़प में 42 लोग मारे गए और 10 अन्य घायल हो गए। घायलों को प्रांतीय स्वास्थ्य केंद्र में पहुंचाया गया है। महामत ने कहा कि प्रतिशोध की यह श्रृंखला काफी बड़े क्षेत्र में फैल गई थी, जिसके बाद सेना को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने कहा कि सेना की “त्वरित प्रतिक्रिया” से झड़पों को रोका जा सका और अब स्थिति “नियंत्रण में” है।

सरकार ने किया न्यायिक कार्यवाही शुरू करने का ऐलान

उप-प्रधानमंत्री ने इस हिंसा के बाद गांव में ‘परंपरागत मध्यस्थता’ प्रक्रिया शुरू करने और आपराधिक जिम्मेदारी तय करने के लिए न्यायिक कार्यवाही शुरू करने की घोषणा की। मध्य अफ्रीकी देश चाड में संसाधनों को लेकर समुदायों के बीच झड़पें आम हैं। पिछले साल दक्षिण-पश्चिमी चाड में किसानों और चरवाहों के बीच हुई झड़प में भी 42 लोग मारे गए थे और कई घर जलाए गए थे। महामत ने कहा कि सरकार सीमा क्षेत्र में अस्थिरता फैलने से रोकने के लिए “सभी आवश्यक उपाय” करेगी।

सूडान के शरणार्थी भी हैं वजह

चाड के पूर्वी प्रांत कई महीनों से सूडान में चल रहे युद्ध से भागकर आए शरणार्थियों को आश्रय दे रहे हैं। इससे संसाधनों और सुरक्षा पर बढ़ता दबाव पड़ रहा है। फरवरी में चाड ने सूडान के साथ अपनी सीमा “अगली सूचना तक” बंद कर दी थी। सरकार ने इसे अपने क्षेत्र में संघर्ष फैलने से रोकने का प्रयास बताया था, क्योंकि सूडान के युद्धरत गुटों के लड़ाके कई बार सीमा पार कर चुके थे।

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