साओ पाउलो: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी से ब्राजील के मौजूदा राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा की लोकप्रियता बढ़ गई है। वहीं दूसरी तरफ पूर्व राष्ट्रपति बोलसानारो की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अब आप सोच रहे होगे कि भला यह कैसे हो सकता है। मगर ये सच है। दरअसल राष्ट्रपति ने ब्राजील पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी दी है। उनके इस बयान ने ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जैर बोलसानारो को मदद करने के बजाय राजनीतिक रूप से और मुश्किल में डाल दिया है, जबकि मौजूदा राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डी सिल्वा को अप्रत्याशित राजनीतिक बढ़त मिल गई है।
क्या है पूरा मामला?
बता दें कि ट्रंप ने पिछले हफ्ते ब्राजील के राष्ट्रपति लूला को पत्र लिखकर 50% आयात कर लगाने की चेतावनी दी थी और इसे बोलसोनारो के चल रहे मुकदमे से जोड़ा था, जिसे उन्होंने “राजनीतिक प्रतिशोध” करार दिया। ट्रंप ने बोलसोनारो को भी अलग से पत्र भेजकर मुकदमे को तुरंत खत्म करने की मांग की। मगर ट्रंप की यह रणनीति उलटी पड़ गई। ब्राजील की सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए बोलसोनारो के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी। शुक्रवार को पुलिस ने उनके घर और राजनीतिक कार्यालय पर छापेमारी की। साथ ही उन्हें इलेक्ट्रॉनिक निगरानी (एंकल मॉनिटर) पहनने का आदेश दिया गया। इतना ही नहीं कोर्ट ने बोलसानारो के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी। इसके अलावा कई और अन्य प्रतिबंध लगा दिए गए।
लूला को मिली राजनीतिक बढ़त
ट्रंप के इस बयान ने जहां पूर्व राष्ट्रपति बोलसानारो की मुश्किलें बढ़ाई तो वहीं दूसरी तरफ उनकी इस कार्रवाई ने लूला को राजनीतिक संजीवनी दे दी। जहां पहले उनकी लोकप्रियता में गिरावट देखी जा रही थी, वहीं अब जनता और संसद से उन्हें समर्थन मिलने लगा है। निजी सर्वेक्षण एजेंसी एटलस के अनुसार ट्रंप के बयान के बाद लूला की स्वीकृति रेटिंग जून में 47.3% से बढ़कर 49.7% हो गई है। सर्वे में शामिल 62.2% ब्राज़ीली नागरिकों ने अमेरिकी टैरिफ को अनुचित बताया है।
ट्रंप पर हमलावर हुए ब्राजील के राष्ट्रपति
ब्राजील के राष्ट्रपति लूला ने गुरुवार को अमेरिका को सख्त चेतावनी देते हुए एक छात्र सभा में कहा, “कोई विदेशी इस राष्ट्रपति को आदेश नहीं देगा।” उन्होंने ट्रंप की टैरिफ धमकी को “अस्वीकार्य ब्लैकमेल” बताया। पारंपरिक रूप से दक्षिणपंथी विचारधारा का समर्थक रहा ब्राजील का सबसे बड़ा आर्थिक क्षेत्र एग्रीबिज़नेस ने भी ट्रंप की कार्रवाई की तीखी आलोचना की। उद्योग संगठनों ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित और व्यापारिक तर्क से रहित बताया। यहां तक कि बोलसोनारो के पूर्व उपराष्ट्रपति हैमिल्टन मोराओ ने भी ट्रंप की दखलंदाज़ी को ब्राज़ील की संप्रभुता का उल्लंघन बताया।
सुप्रीम कोर्ट में जारी है मुकदमा
बोलसोनारो पर सुप्रीम कोर्ट में लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश रचने, आपराधिक संगठन का नेतृत्व करने और तख्तापलट की कोशिश जैसे गंभीर आरोप चल रहे हैं। कोर्ट ने उनके बेटे एडुआर्डो बोलसोनारो की भूमिका की भी जांच शुरू की है, जो अमेरिका में रहते हैं और ट्रंप के करीबी माने जाते हैं। जज अलेक्जेंड्रे दे मोराएस ने कहा, “ब्राजील एक संप्रभु देश है और हमारी न्यायपालिका किसी विदेशी दबाव को स्वीकार नहीं करेगी।” बोलसोनारो ने इसे अपना “सुप्रीम अपमान” बताया, जबकि उनके बेटे एडुआर्डो ने कोर्ट पर ट्रंप और अमेरिका को अपराधी ठहराने की कोशिश का आरोप लगाया। (एपी/पीटीआई):