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पारिवारिक बंधन से बंधे हैं भारत-सूरीनाम के संबंध, विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा-कई क्षेत्रों में सहयोगी हैं दोनों देश

 Edited By: Dharmendra Kumar Mishra
 Published : May 06, 2026 12:41 pm IST,  Updated : May 06, 2026 12:41 pm IST

भारत-सूरीनाम के बीच कूटनीतिक संबंधों के 50 साल पूरे हो गए हैं। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के संबंध पारिवारिक बंधन में बंधे हैं।

सूरीनाम के विदेश मंत्री मेल्विन बौवा के साथ एस जयशंकर। - India TV Hindi
सूरीनाम के विदेश मंत्री मेल्विन बौवा के साथ एस जयशंकर। Image Source : X@DRSJAISHANKAR

परामारिबो: भारत और सूरीनाम के कूननीतिक संबंधों के 50 साल पूरे हो गए हैं। इस मौके पर विदेश मंत्री एस.जयशंकर सूरीनाम की यात्रा पर हैं। उन्होंने राजधानी परामारिबो में कहा कि भारत सूरीनाम को "दूर के साझेदार" के रूप में नहीं, बल्कि "परिवार" की तरह देखता है। दोनों देश कूटनीतिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे कर रहे हैं। जयशंकर ने बुधवार को सूरीनाम यात्रा से पहले ‘टाइम्स ऑफ सूरीनाम’ अखबार में लिखा कि दोनों देशों के बीच संबंध अब बुनियादी ढांचा, व्यापार, प्रशिक्षण और सांस्कृतिक संबंधों को शामिल करते हुए "मजबूत और बहुआयामी" हो गए हैं।

भारत-सूरीनाम में पारिवारिक संबंध 

उन्होंने कहा कि भारत-सूरीनाम के संबंध पारिवारिक बंधन में बंधे हैं। उच्च स्तरीय आदान-प्रदान के माध्यम से दोनों देशों ने सहयोग को मजबूत किया है, जिसमें 2023 में भारतीय प्रवासी सम्मेलन के लिए सूरीनाम के पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिकाप्रसाद संतोखी की भारत यात्रा और उसी वर्ष भारतीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की सूरीनाम यात्रा शामिल है। जयशंकर ने लिखा कि भारतीय क्रेडिट रेखा के तहत सूरीनाम में कई परियोजनाएं पूरी की गई हैं, जिनमें औद्योगिक बंदरगाह शहर परानाम से राजधानी परामारिबो तक 161 केवी विद्युत ट्रांसमिशन लाइन, जल पंपिंग स्टेशन, निर्माण मशीनरी, बिजली ढांचे का उन्नयन और तीन चेतक हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति व रखरखाव शामिल हैं।

भारत रहा है सूरीनाम का बड़ा मददगार

जयशंकर ने बताया कि भारत ने पिछले साल सूरीनाम को खाद्य सुरक्षा में मदद के लिए 425 मीट्रिक टन खाद्य पदार्थ (लगभग 1 करोड़ डॉलर मूल्य के) उपलब्ध कराए थे। उन्होंने कहा कि भारत समर्थित अनुदान परियोजनाओं में बाढ़ चेतावनी प्रणाली, स्टेडियम और शिक्षा, खेल व तकनीकी प्रशिक्षण से जुड़े सामुदायिक कार्यक्रम शामिल हैं। जयशंकर ने यह भी कहा कि वे भारतीय अनुदान से वित्तपोषित पैशन फ्रूट प्रोसेसिंग और पैकेजिंग यूनिट के उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे। "यह स्थानीय किसानों को सशक्त बनाएगा और मूल्य संवर्धित उद्योग के माध्यम से सूरीनाम की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगा,"। 

यूएनएससी में सुधार के मुद्दे पर भारत-सूरीनाम का समान रुख

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जयशंकर ने कहा कि भारत और सूरीनाम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधार समेत कई मुद्दों पर समान रुख रखते हैं। उन्होंने भारत समर्थित पहलों जैसे अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और अंतरराष्ट्रीय बिग कैट गठबंधन में सूरीनाम की भागीदारी पर भी प्रकाश डाला। भौगोलिक दूरी के बावजूद दोनों देश 1873 में जहाज ‘लल्ला रूख’ से भारतीयों के आगमन से शुरू हुई साझा इतिहास से जुड़े हुए हैं। जयशंकर ने लिखा कि भारतीय समुदाय सूरीनाम की समाज का अभिन्न अंग बन चुका है और वह सरनामी हिंदुस्तानी भाषा, बैठक संगीत तथा दिवाली और फागवा जैसे त्योहारों जैसी सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित रखे हुए है।"

जयशंकर ने कहा कि सूरीनाम ने हिंदी भाषा को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने याद दिलाया कि देश ने 2003 में परामारिबो में विश्व हिंदी सम्मेलन की मेजबानी की थी। सूरीनाम में भारत दूर के साझेदार को नहीं देखता; भारत परिवार को देखता है।

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