इस्लामाबाद: पहले मासूम बच्चे निशाना बने थे अब टीचरों के सीने भी छलनी हुए हैं। निशाना भले ही बदला हो, लेकिन गुनगहार अब भी वो आतंकी ही हैं जिनकी गोलियां सिर्फ दहशत और खून बहाना जानती हैं। आज पाकिस्तान के अशांत पश्चिमोत्तर प्रांत खैबर-पख्तूनख्वा के चारसद्दा कस्बे में स्थित जानी मानी बाचा यूनिवर्सिटी पर कुछ हथियारबंद दहशतगर्दों हमला बोल दिया। इस हमले में शिक्षक समेत 25 लोग अब तक अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि 50 से ज्यादा लोग बुरी तरह घायल हैं। भले ही इस घटना की जिम्मेदारी पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान ने ले ली हो लेकिन बीते दो सालों में एक बार फिर से तालीम के मंदिर में खून बहा है।
यही कुछ दो साल पहले की ही बात है जब पेशावर के एक आर्मी स्कूल में छोटे-छोटे प्यारे प्यारे उन मासूम बच्चों के सीने में गोलियां उतार दी गई थीं जिन्हें उनके मां-बाप ने तैयार कर तालीम लेने के लिए भेजा था, हर रोज स्कूल की वैन में अपने घर पर लौटने वाले बच्चे उस रोज ताबूतों में उनके अपनों को सौंपे गए थे। गौरतलब है कि पाकिस्तान की सियासत और सरकार इस तरह की घटनाओं पर सिर्फ खानापूर्ति भर कर देती है और गुनहगार किसी और ठिकाने पर हमले की योजना में लग जाते हैं, लेकिन तालीम के मंदिर में इस तरह के हमलों का बढ़ना बड़े सवाल खड़े करता है।
क्या हुआ आज:
पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर अशांत प्रांत खैबर पख्तूनख्वा के चारसद्दा कस्बे में स्थित एक जानी मानी बाचा यूनिवर्सिटी में कुछ हथियारबंद लोगों ने हमला कर दिया। यूनीवर्सिटी में घुसते ही आतंकियों ने अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरु कर दीं। अभी तक प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस हमले में 25 लोगों के मारे जाने की खबर है, जबकि 50 से ज्यादा अन्य लोग घायल भी हो चुके हैं। आपको बता दें कि यह यूनीवर्सिटी पेशावर के दक्षिण पश्चिमी छोर से सिर्फ 50 किलोमीटर की दूरी पर ही है। जानकारी के मुताबिक इस हमले को 4 से 10 आतंकियों ने अंजाम दिया है। इस घटना के बाद शहर के तमाम अस्पतालों में आपातकाल लागू कर दिया गया है। बताया जाता है कि यूनीवर्सिटी पर जिस वक्त हमला हुआ तब वहां पर 3000 के करीब छात्र मौजूद थे।
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