नयी दिल्ली: बांग्लादेश के विदेश मंत्री ए के अब्दुल मोमेन और गृह मंत्री असदुज्जमां खान ने भारतीय संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक के पारित होने से उत्पन्न स्थितियों के चलते अपना भारत दौरा रद्द कर दिया है। मोमेन ने गुरुवार से शुरू होने वाली अपनी तीन दिवसीय भारत यात्रा आज यहां पहुंचने के निर्धारित समय से चंद घंटे पहले अचानक रद्द कर दी। इससे एक दिन पहले उन्होंने कहा था कि बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न संबंधी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की टिप्पणियां ‘‘असत्य’’ हैं।
वहीं, बांग्लादेश के गृह मंत्री खान को तीन दिवसीय भारत यात्रा पर मुख्यत: बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित एक कार्यक्रम में शामिल होने शुक्रवार को शिलांग पहुंचना था। विदेश मंत्रालय ने कहा कि मोमेन ने कार्यक्रम संबंधी मुद्दों की वजह से 12 से 14 दिसंबर तक चलने वाली अपनी भारत यात्रा रद्द करने की सूचना दी है। इसने यह भी कहा कि शाह ने बांग्लादेश में सैन्य शासन के दौरान धार्मिक अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न होने की बात कही थी, न कि वर्तमान सरकार के तहत। राजनयिक सूत्रों ने कहा कि मोमेन ने भारतीय संसद में नागरिकता संशोधन विधेयक पारित होने के बाद उत्पन्न स्थितियों के चलते यात्रा न करने का फैसला किया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ‘‘बांग्लादेश की तरफ से सूचना दी गई है कि मंत्री ने बांग्लादेश में 16 दिसंबर को ‘विजय दिवस’ कार्यक्रम से जुड़े घरेलू मुद्दों के चलते अपने कार्यक्रम में बदलाव किया है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी कोई भी अटकल निराधार है जिसमें यह कहा जाए कि यह घटनाक्रम बुधवार को संसद द्वारा नागरिकता संशोधन विधेयक के पारित होने से जुड़ा है।’’ कुमार ने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध ‘‘स्वर्णिम दौर’’ से गुजर रहे हैं। उधर, ढाका में जारी एक बयान में मोमेन ने कहा कि उन्हें अपनी व्यस्तताओं के चलते भारत की यात्रा रद्द करनी पड़ी और वह जनवरी में भारत यात्रा को लेकर आशान्वित हैं। इससे पहले विदेश मंत्रालय द्वारा जारी सूचना के अनुसार मोमेन को आज शाम पांच बजकर बीस मिनट पर नयी दिल्ली पहुंचना था।
मोमेन ने कहा ,‘‘मुझे भारत का दौरा रद्द करना पड़ा क्योंकि मुझे ‘बुद्धिजीवी दिवस’ और ‘विजय दिवस’ में भाग लेना है। इसके अलावा हमारे राज्य मंत्री मैड्रिड में हैं और विदेश सचिव हेग में हैं।’’ बांग्लादेश सरकार ने एक बयान में कहा कि देश में ‘व्यस्तताओं’ के कारण विदेश मंत्री को भारत दौरा रद्द करना पड़ा । नागरिकता (संशोधन) विधेयक बुधवार को राज्यसभा में पारित हो गया। इससे पहले यह विधेयक सोमवार को लोकसभा में पारित हुआ था। अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान में धार्मिक प्रताड़ना के कारण 31 दिसंबर 2014 तक भारत आए गैर मुस्लिम शरणार्थी -- हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों-- को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का विधेयक में प्रावधान किया गया है। मोमेन ने बुधवार को ढाका में कहा था कि नागरिकता विधेयक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में भारत के ऐतिहासिक चरित्र को कमजोर कर सकता है। उन्होंने इन आरोपों को खारिज किया था कि उनके देश में अल्पसंख्यकों को उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है। उन्होंने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न संबंधी शाह की टिप्पणियों को ‘‘असत्य’’ करार दिया था।
मोमेन ने उल्लेख किया कि वर्तमान में दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंध हैं और यह द्विपक्षीय संबंधों का ‘‘स्वर्णिम अध्याय’’ है। उन्होंने कहा, ‘‘यह स्वाभाविक है कि हमारे लोग (बांग्लादेशी) उम्मीद करते हैं कि भारत ऐसा कुछ नहीं करेगा जिससे उन्हें चिंता हो।’’ कुमार ने कहा कि बुधवार को राज्यसभा में चर्चा के दौरान शाह ने बांग्लादेश में शेख मुजीब उर रहमान के कार्यकाल के बाद सैन्य शासन के दौरान धार्मिक अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न होने की बात कही थी। विदेश मंत्रालय द्वारा यहां साझा किए गए शाह की टिप्पणियों के अंशों के अनुसार, ‘‘जब तक शेख मुजीब उर रहमान बांग्लादेश का नेतृत्व कर रहे थे, तब तक सबकुछ ठीक था। लेकिन एक बार उनकी सरकार जाने के बाद अल्पसंख्यकों का दमन होने लगा। मैं आपको बता सकता हूं कि बड़ी संख्या में बांग्लादेशी हिन्दू शरण लेने आए। ’’ इसने कहा, ‘‘वर्तमान सरकार भी धार्मिक अल्पसंख्यकों का ध्यान रख रही है। यह धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए प्रबंध भी कर रही है, लेकिन बीच में विगत में एक लंबा समय रहा है जब लोग धार्मिक उत्पीड़न के शिकार होकर भारत आए।’’
बांग्लादेश के विदेश मंत्री को यहां 11वीं दिल्ली वार्ता और छठी हिन्द महासागर वार्ता के संयुक्त सत्र को संबोधित करना था और विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात करनी थी। यहां बांग्लादेश उच्चायोग ने अलग से एक बयान में कहा कि मोमेन को देश में अचानक से किसी राष्ट्रीय कार्यक्रम की वजह से अपनी यात्रा रद्द करनी पड़ी। इसने कहा, ‘‘उन्होंने कहा कि उन्हें दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्यक्रमों-14 दिसंबर को शहीद बुद्धिजीवी दिवस और 16 दिसंबर को विजय दिवस में शामिल होना है। ये आयोजन उनकी निर्धारित भारत यात्रा के साथ ही पड़ रहे हैं।’’ माना जाता है कि बांग्लादेश लगभग चार महीने पहले असम की राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) को लेकर भी नाराज था। हालांकि, भारत ने इससे कहा था कि यह देश का आंतरिक मामला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ न्यूयॉर्क में सितंबर में मुलाकात के दौरान बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भी एनआरसी का मुद्दा उठाया था।