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बांग्लादेश: जमात-ए-इस्लामी के नेता मीर कासिम अली को फांसी दी गई

 Written By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Sep 03, 2016 10:54 pm IST,  Updated : Sep 03, 2016 11:24 pm IST

बांग्लादेश ने युद्ध अपराधों के लिए जमात-ए-इस्लामी के महत्वपूर्ण नेताओं में से एक मीर कासिम अली को फांसी पर लटका दिया। कासिम अली को यह सजा 1971 के युद्ध के दौरान किए गए अत्याचारों के लिए वॉर ट्रिब्यूनल ने दी थी।

मीर कासिम अली।- India TV Hindi
मीर कासिम अली।

ढाका: बांग्लादेश ने युद्ध अपराधों के लिए जमात-ए-इस्लामी के महत्वपूर्ण नेताओं में से एक मीर कासिम अली को फांसी पर लटका दिया। कासिम अली को यह सजा 1971 के युद्ध के दौरान किए गए अत्याचारों के लिए वॉर ट्रिब्यूनल ने दी थी। गृह मंत्री असदुज्जमां खान ने बताया कि कासिम को स्थानीय समयानुसार 10 बजकर 35 मिनट पर फांसी दी गई। इससे पहले कासिम को परिवार को शनिवार को काशिमपुर केंद्रीय कारागार में उनसे आखिरी बार मिलने के लिए कहा गया था और उनसे मिलने परिवार के 22 लोग पहुंचे भी थे। जमात-ए-इस्लामी के नेता और कट्टरपंथी पार्टी के कोषाध्यक्ष कासिम के परिवार ने उन्हें फांसी पर लटकाए जाने को स्वीकार कर लिया था।

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कासिम ने शुक्रवार को अपनी राष्ट्रपति से क्षमादान के लिए प्रार्थना करने से इनकार कर दिया था। कासिम की बेटी सुमैया राबिया ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा कि उनके पिता एक नरम दिल व्यक्ति हैं, जो हर बार अपने भाषण के दौरान रोते थे। सुमैया ने कहा कि उनका परिवार शायद उनसे अंतिम बार मिलने के लिए जाएगा और उन्होंने उनके मृत्युदंड को स्वीकार कर लिया है। इससे उन्हें शहादत हासिल होगी, जिसके लिए उन्होंने ताउम्र संघर्ष किया है। उनके परिवार के 22 सदस्य कासिम अली से अंतिम बार मिलने जेल पहुंचे। मीर कासिम अली बांग्लादेश के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक थे।

जेल प्रशासन ने कासिम की पत्नी आयशा खातून को अपने पति से शनिवार दोपहर में मिलने के लिए कहा था। सरकारी अनुमति के बाद कासिम को फांसी पर चढ़ा दिया गया। चटगांव में 1971 की आजादी की लड़ाई के दौरान कासिम (63) के अत्याचारों के कारण उनका नाम 'बंगाली खान' के रूप में मशहूर हो गया था। 2014 में देश में विशेष तौर पर गठित 'अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण'(आईसीटी) ने अल बदर कमांडर के रूप में 1971 के आजादी के युद्ध के दौरान उनके द्वारा किए गए अत्याचारों के लिए उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। सुप्रीम कोर्ट के अपीली खंड ने मंगलवार को उनकी आखिरी समीक्षा याचिका नामंजूर कर दी थी।

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