बीजिंग: चीन ने गत एक साल में अपने सरकारी तेल भंडारों की संख्या दोगुना बढ़ाकर आठ कर दी है और उनकी क्षमता भी बढ़ाकर लगभग दोगुनी कर दी है। ऐसा आपूर्ति से संबंधित जोखिमों से निपटने के लिए किया गया है। नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (एनबीएस) द्वारा शुक्रवार को जारी बयान के मुताबिक चीन ने 2015 के मध्य तक 8 ऐसे भंडार बना लिए हैं, जिनकी कुल भंडारण क्षमता 2.86 करोड़ घन मीटर है।
एनबीएस ने कहा कि नवंबर में चार भंडार संचालन में थे, जिनमें 1.64 करोड़ घन मीटर तेल रखा जा सकता था। एनबीएस के मुताबिक 2015 के मध्य तक आठ भंडारों और गैर सरकारी भंडारों में 2.61 करोड़ घन मीटर तेल का भंडार मौजूद था।
स्टेट स्ट्रैटेजिक ऑयल रिजर्व बेस प्रोग्राम 2004 में शुरू किया गया था, जिसका मकसद वैश्विक तेल बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव के प्रभाव से घरेलू बाजार को बचाना था। चीन दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है और अपनी जरूरत के करीब 60 फीसदी तेल का आयात करता है।
दुनिया में सबसे ज़्यादा ऊर्जा का इस्तेमाल करने वाले देशों में शामिल चीन पिछले कुछ सालों से सारी दुनिया में ऊर्जा के स्रोतों पर कब्ज़ा करने में जुटा हुआ है। एशिया औऱ अफ्रीका में वह कई ऑयल औऱ गैस फील्ड को खरीद चुका है। साउथ चाइना सी पर भी उसकी आक्रामक पहला ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के मद्देनज़र ही है, क्योंकि इस इलाके में ऑयल औऱ गैस के बड़े भंडार होने का अनुमान है।