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दक्षिणी चीन सागर मसले पर चीन ने दी कड़ी चेतावनी

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jul 14, 2016 06:50 pm IST,  Updated : Jul 14, 2016 06:50 pm IST

चीन ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण दक्षिण चीन सागर (एससीएस) में अपने विस्तारवादी दावों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण के फैसले को लागू करने के किसी भी उकवावे वाले कदम पर निर्णायक प्रतिक्रिया की आज चेतावनी दी।

South China Sea- India TV Hindi
South China Sea

बीजिंग: चीन ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण दक्षिण चीन सागर (एससीएस) में अपने विस्तारवादी दावों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण के फैसले को लागू करने के किसी भी उकवावे वाले कदम पर निर्णायक प्रतिक्रिया की आज चेतावनी दी। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने संवाददाताओं से कहा, मैं इस पर जोर देना चाहता हूं कि यदि किसी ने फैसले के आधार पर चीन की सुरक्षा हितों के खिलाफ कोई उकसावे वाला कदम उठाया तो चीन निर्णायक जवाब देगा।

स्थायी मध्यस्थता अदालत (पीसीए) की ओर से नियुक्त न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए फैसले के प्रभाव के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वह अवैध था क्योंकि उसका गठन फिलीपिन की पूर्ववर्ती सरकार के गैरकानूनी अनुरोध पर किया गया था। उन्होंने कहा कि उसके द्वारा दिए गए फैसले का चीन की वर्तमान नीति पर कोई प्रभाव नहीं होगा। चीन ने गत मंगलवार को न्यायाधिकरण के उस फैसले पर बेहद नाराजगी भरी प्रतिक्रिया जताई थी जिसमें उसने कहा था कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में चीन के दावे का कोई आधार नहीं बनता है जहां से वार्षिक रूप से तीन हजार अरब डालर का व्यापार होता है।

चीन ने कहा था कि वह फैसला नहीं मानेगा। चीन ने बीते दिन चेतावनी दी कि फैसला लागू करने की कोई भी हठ संसाधन समृद्ध इस क्षेत्र को युद्ध क्षेत्र में तब्दील कर देगी।

दक्षिण चीन सागर में चीन के विस्तारवादी दावों का फिलीपिन, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताईवान विरोध करते हैं। लू ने कहा कि चीन ने ऑस्ट्रेलिया के समक्ष उसकी विदेश मंत्री की टिप्पणियों को लेकर विरोध दर्ज कराया है जिन्होंने कहा था कि ऑस्ट्रेलिया न्यायाधिकरण के फैसले के आलोक में नौवहन और उपर से उड़ान भरने के अपने अंतरराष्ट्रीय अधिकारों का इस्तेमाल करता रहेगा और अन्य द्वारा इसी तरह करने का समर्थन करेगा।

उन्होंने ऑस्ट्रेलिया से कहा कि वह फैसले के अवैध परिणाम को मान्यता नहीं देने में बहुसंख्यक अंतरराष्ट्रीय समुदाय में शामिल हो। लू ने कहा कि चीन अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत नौवहन और उपर से उड़ान भरने की स्वतंत्रता के अधिकार का सम्मान करता है। उन्होंने कहा कि फैसले के बाद भविष्य के कदम पर चर्चा के लिए चीन और फिलीपिन सम्पर्क में हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति रोड्रिगो ड्यूर्टे के नेतृत्व वाली फिलीपिन की सरकार चीन के साथ वार्ता बहाल करने को लेकर सकारात्मक है। उन्होंने कहा, हम उसका स्वागत करते हैं और इसके लिए हमारे दरवाजे खुले हुए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश कूटनीतिक जरिए से पहले से ही एकदूसरे के सम्पर्क में हैं। 2013 में कानूनी लड़ाई शुरू करने वाले फिलीपिन ने चीन से कहा है कि वह न्यायाधिकरण के फैसले का सम्मान करे।

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