वियनतियाने: चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने शनिवार को यहां कहा कि दक्षिण चीन सागर मुद्दे पर ब्रुनेई, कंबोडिया तथा लाओस के साथ चार बिंदुओं पर सहमति बन गई है। वांग ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चारों देशों ने इस बात पर सहमति जताई है कि दक्षिण चीन सागर में कुछ द्वीपों, चट्टानों व छिछले स्थानों पर चीन तथा दक्षिणपूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) के बीच क्षेत्रीय विवाद कोई मुद्दा नहीं है और इसका चीन-आसियान के संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
उन्होंने इस बात पर सहमति जताई है कि विवादों के निपटारे के लिए अंतर्राष्ट्रीय कानून का आदर किया जाना चाहिए और मुद्दे के समाधान के लिए यह रास्ता चुनने के लिए संप्रभु राष्ट्र स्वतंत्र हैं। किसी भी देश पर किसी भी तरह का एक पक्षीय एजेंडा थोपने के प्रयास का उन्होंने विरोध किया है। चारों देशों ने यह भी सहमति जताई है कि दक्षिण चीन सागर (डीओसी) मुद्दे पर पक्षकारों के आचरण पर घोषणा से संबंधित अनुच्छेद 4 के तहत संबंधित पक्षों द्वारा समुद्री विवादों को विचार-विमर्श तथा समझौतों द्वारा सुलझाया जाना चाहिए।
दक्षिण चीन सागर के अनेक हिस्सों पर कई देश अपना अधिकार जताते रहे हैं। उधर, चीन तो करीब-करीब पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना हक जताने लगा है। दरअसल दक्षिण चीन सागर वह जगह है, जहां से धरती का करीब एक तिहाई समुद्री जहाज़ गुज़रते हैं और इस क्षेत्र में विशाल मात्रा में गैस और पेट्रोल होने की उम्मीद जताई जा रही है। यही वजह है कि इस क्षेत्र के आसपास के देश इस पर अपना हक जताते हैं।