बीजिंग: चीन ने आज कहा कि वह देश के धार्मिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप को मंजूरी नहीं देगा और पाकिस्तान जैसे देशों से लगे अपने अशांत प्रांत शिनजियांग में इस्लामी आतंकियों पर कार्रवाई का बचाव करते हुए उसे अपने मौलिक हितों की हिफाजत के लिए की गयी सही कार्रवाई बताया। चीन सरकार के श्वेत पत्र में कहा गया कि शिनजियांग में अभूतपूर्व धार्मिक स्वतंत्रता है और प्रांत में धार्मिक आस्था की स्वतंत्रता किसी भी दूसरे ऐतिहासिक दौर की स्वतंत्रता की बराबरी नहीं कर सकती।
शिनजियांग में धार्मिक आस्था की स्वतंत्रता शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया कि धार्मिक चरमपंथी धर्म के नाम पर कट्टरपंथी एवं चरमपंथी विचारों का प्रसार करते हैं और चरमपंथी माध्यमों का सहारा लेकर धर्म की प्रधानता वाली व्यवस्था की स्थापना करने की कोशिश करते हैं। इसमें दावा किया गया कि 1949 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना के बाद से देश में नागरिकों की धार्मिक आस्था की स्वतंत्रता का पूरा सम्मान हो रहा है और धर्म में विश्वास रखने वालों की धार्मिक जरूरतें प्रभावी तरीके से पूरी की जा रही हैं। इसमें कहा गया कि धार्मिक चरमपंथ स्वभाव से मानव विरोधी, समाज विरोधी, सभ्यता विरोधी और धर्म विरोधी है।
रिपोर्ट में धार्मिक चरमपंथ से लड़ने में चीन की कोशिशों का बचाव करते हुए कहा गया कि यह देश और लोगों के मौलिक हितों की रक्षा करने के लिए की गयी सही कार्रवाई है। श्वेत पत्र में कहा गया कि चीन सरकार धार्मिक मामलों के राजनीतिकरण और धर्म के नाम पर चीन के घरेलू मामलों में किसी दूसरे देश के हस्तक्षेप का दृढ़ता से विरोध करती है। इसमें कहा गया, चीन किसी भी विदेशी संगठन या व्यक्ति को अपने धार्मिक मामलों में कभी भी हस्तक्षेप की मंजूरी नहीं देगा।
शिनजियांग में तुर्की मूल के एक करोड़ उईगर मुसलमान रहते हैं। प्रांत में हान जाति को बसाने के मुद्दे पर पिछले कुछ सालों से अशांति है। प्रांत और बीजिंग सहित देश के कुछ हिस्सों में कई आतंकी हमले हुए हैं, जिसके लिए चीन सरकार अलगाववादी ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट को दोषी ठहराती है।