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पाकिस्तानी राष्ट्रपति का आरोप, वार्ता से पीछे हट रहा है भारत

 Written By: Bhasha
 Published : Jun 02, 2016 07:42 am IST,  Updated : Jun 02, 2016 07:43 am IST

इस्लामाबाद: राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने आज भारत पर आरोप लगाया कि पठानकोट आतंकवादी हमले की संयुक्त जांच के लिए पाकिस्तान की तरफ से पेशकश किए जाने के बावजूद भारत वार्ता से पीछे हट रहा है।

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इस्लामाबाद: राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने आज भारत पर आरोप लगाया कि पठानकोट आतंकवादी हमले की संयुक्त जांच के लिए पाकिस्तान की तरफ से पेशकश किए जाने के बावजूद भारत वार्ता से पीछे हट रहा है। साथ ही उन्होंने कश्मीर मुद्दे को उठाते हुए इसे बंटवारे का अधूरा एजेंडा और क्षेत्रीय तनाव का मुख्य कारण करार दिया।

वर्तमान संसद के चौथे वर्ष की शुरूआत में संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए हुसैन ने कहा, वार्ता (भारत के साथ) बहाल करने के पाकिस्तान के प्रयास और पठानकोट हमले की संयुक्त जांच की पेशकश के बावजूद विदेश सचिव स्तर की वार्ता अब भी स्थगित है। पाकिस्तान इसको लेकर चिंतित है।

उन्होंने कहा, ‘हमारा मानना है कि क्षेत्र में तनाव का मुख्य कारण कश्मीर मुद्दा है। यह उपमहाद्वीप के बंटवारे का अधूरा एजेंडा है। जब तक कश्मीर मुद्दे का समाधान कश्मीर के लोगों की इच्छा और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के तहत नहीं होता तब तक इस क्षेत्र की समस्याओं का समाधान नहीं होगा।’

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान एक शांतिपूर्ण देश है और चाहता है कि इसकी विदेश नीति सभी देशों के साथ मित्रता और भाईचारे पर आधारित हो। उन्होंने कहा, ‘हम किसी भी देश के प्रति आक्रामक नहीं होना चाहते और ईमानदारी से राष्ट्रीय और वैश्विक मामलों में भागीदारी करना चाहते हैं।’

राष्ट्रपति ने कहा कि पाकिस्तान अपने सभी पड़ोसियों के साथ वार्ता के माध्यम से विवादों का समाधान कर शांतिपूर्ण संबंध चाहता है और भारत पर आरोप लगाया कि वह पाकिस्तान के साथ वार्ता से भाग रहा है। उन्होंने कहा कि देश में लोकतंत्र मजबूत हुआ है और यह अब विभिन्न तरह के संकटों का सामना कर सकता है।

उन्होंने कहा, हमारी राजनीतिक व्यवस्था काफी मजबूत हुई है जो सफलतापूर्वक विभिन्न संकटों का सामना कर सकती है। इसका मतलब है कि हमारा राष्ट्र इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि सतत प्रगति और स्थिरता लोकतंत्र के बिना हासिल नहीं की जा सकती। उन्होंने संसद के तीन वर्ष पूरे होने पर सांसदों को बधाई भी दी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आर्थिक क्षेत्र में प्रगति कर रहा है और 30 जून को समाप्त हो रहे वित्त वर्ष में देश ने 4.7 फीसदी की वृद्धि दर हासिल की है।

उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक प्रगति के लिए पाकिस्तान-चीन साझीदारी महत्वपूर्ण है और कई अरब डॉलर की लागत से बनने वाले चीन-पाकिस्तान आर्थिक कोरीडोर को हर कीमत पर पूरा किया जाएगा।

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