नेपाल: भारत ने आज कहा कि इसका पुरजोर मानना है कि एक शांतिपूर्ण और सुरक्षित पड़ोस दक्षेस देशों को फायदा पहुंचाएगा, जबकि इसने यह भी कहा कि संगठन के अतीत के उन फैसलों का जायजा लेने का वक्त आ गया है जिन पर कोई गतिविधि नहीं हुई है। यहां 42 वीं दक्षेस स्थायी समिति बैठक के दौरान एक बयान में विदेश सचिव एस जयशंकर ने कहा कि भारत अपनी पुनजागृत शक्ति पड़ोसी पहले की नीति को आगे बढ़ा रहा है जो दक्षेस कोशिशों के लिए प्राथमिकता में भी तब्दील होगा। सोमवार को यहां पहुंचे जयशंकर ने कहा, हमारा मानना है कि दक्षेस प्रक्रियाओं को और अधिक तर्कसंगत बनाने की गुंजाइश है। शायद हमारे लिए वक्त आ गया है कि अतीत के फैसलों और कोशिशों का जायजा लें। हालांकि ऐसे फैसलों के इतने सारे दृष्टांत हैं जिनमें बरसों तक गतिविधि नहीं देखी गई है। उन्होंने कहा, हमारा दृढ़ता से मानना है कि शांतिपूर्ण, सुरक्षित और समृद्ध पड़ोस हम सभी के लिए काफी फायदेमंद रहेगा। उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि संगठन ने आतंकवाद रोधी समझौता सहित सुरक्षा, मादक पदार्थ और मानव तस्करी की चुनौती के क्षेत्र में कुछ उपयोगी समझौते किए हैं। जयशंकर ने कहा कि एक बड़ी चुनौती यह है कि क्षेत्र जाली नोटों के प्रसार की चुनौती का सामना कर रहा है।
विदेश सचिव ने कहा कि समृद्धि और विकास की कुंजी संपर्क में है तथा यह दक्षिण एशिया के सभी देशों की नियति को आकार देगा। जयशंकर ने कहा कि सामूहिक कोशिश के रूप में क्षेत्रीय सहयोग की गति तेज करने की जरूरत है। इस परिप्रेक्ष्य में मैंने जल्द से जल्द दक्षेस मोटर वाहन समझौता और दक्षेस रेल समझौता पर आगे बढ़ने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि इन समझौतों को अंतिम रूप देने और लागू करने के बाद हम समूचे क्षेत्र में यात्रियों एवं माल की निर्बाध आवाजाही के लंबे समय से चले आ रहे सपने को साकार करेंगे। जयशंकर का बयान दक्षेस मंत्रीस्तरीय बैठक से एक दिन पहले आया है। अपनी नेपाल यात्रा के दौरान विदेश सचिव ने कल नेपाली प्रधानमंत्री केपी ओली से और मधेसी नेताओं से भी मुलाकात की।