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RJD की 6 प्रत्याशियों की सूची सामने आने के बाद भड़कीं लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य, लगाए गंभीर आरोप

 Reported By: Nitish Chandra,  Written By: Rituraj Tripathi
 Published : Sep 12, 2026 12:01 pm IST,  Updated : Sep 12, 2026 12:15 pm IST

बिहार विधान परिषद् स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन-2026 के लिए RJD द्वारा अधिकृत 6 प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी गई है। इसको लेकर लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य का बयान सामने आया है।

Rohini Acharya- India TV Hindi
रोहिणी आचार्य Image Source : PTI/FILE

पटना: बिहार विधान परिषद् स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन-2026 के लिए RJD द्वारा अधिकृत 6 प्रत्याशियों की सूची जारी करने के बाद लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य का बयान सामने आया है। उन्होंने एक्स हैंडल पर पोस्ट करके प्रत्याशियों के चयन पर सवाल उठाए हैं और अवसरवादी चेहरे को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया है।

रोहिणी आचार्य ने एक्स पर पोस्ट करके क्या कहा?

रोहिणी आचार्य ने एक्स पर पोस्ट करके कहा, "वैचारिक निष्ठा और लंबे संघर्ष को दरकिनार कर ऐन चुनाव (विधान परिषद चुनाव ) से पहले आए अवसरवादी चेहरों को प्राथमिकता देना समर्पित नेताओं - कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों का घोर अनादर है। दशकों तक लाठियां खाकर पार्टी और संगठन को सींचने वाले नेताओं को दरकिनार करना राजद के आंतरिक लोकतंत्र और जमीनी कैडर के प्रति उदासीनता को दर्शाता है। यह निर्णय न केवल निष्ठावान लालूवादियों के साथ वादाखिलाफी है, बल्कि लालू जी की विचारधारा, पार्टी के मूल सिद्धांतों और संगठन की मजबूती पर भी गहरा आघात है।"

हाल ही में सरकार पर भी उठाए थे सवाल

रोहिणी आचार्य सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं। हाल ही में बाढ़ को लेकर उन्होंने सरकार से सवाल पूछे थे। उन्होंने कहा था, "बिहार में हर साल बाढ़ आती है,  करोड़ों की फसल जलमग्न होकर बर्बाद हो जाती है और किसानों का गंभीर नुकसान होता है । सरकार क्षतिपूर्ति के नाम पर डीबीटी (DBT) पोर्टल के माध्यम से राहत राशि देने का दावा तो करती है, लेकिन हकीकत में यह सहायता ऊँट के मुँह में जीरा साबित होती है l गौरतलब है कि बिहार राज्य फसल सहायता योजना के अंतर्गत बिना किसी प्रीमियम के 7,500 रुपये प्रति हेक्टेयर और 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर (20% से अधिक नुकसान पर) की सहायता राशि प्रदान की जाती है। प्राकृतिक आपदा से 33% या उससे अधिक फसल नुकसान होने पर असिंचित क्षेत्र के लिए 8,500 रुपये, सिंचित क्षेत्र के लिए 17,000 रुपये और बहुवर्षीय फसलों के लिए 22,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से अधिकतम 2 हेक्टेयर तक की आर्थिक मदद दिए जाने का प्रावधान है ।  आज की परिस्थिति और महंगाई के दौर में किसानों को आर्थिक मदद दिए जाने वाले ये तमाम प्रावधान नाकाफी हैं। अब जब प्रति एकड़ / हेक्टेयर खेती की लागत कई गुना बढ़ चुकी है, तब मिलने वाली ऐसी सहायता राशि से अपने भारी आर्थिक घाटे की भरपाई कर पाना किसानों के लिए नामुमकिन है।"

उन्होंने कहा था, "इसके अलावा सर्वेक्षण और सत्यापन की कछुआ चाल तथा कागजी औपचारिकताओं व् अफसरशाही में फैले भ्रष्टाचार की वजह से कई वास्तविक और गैर-रैयत (बटाईदार) किसान सहायता पाने से वंचित भी रह जाते हैं। ऐसे में सवाल सहज ही उठता है कि क्या राज्य सरकार का काम सिर्फ आपदा के बाद नाममात्र व् महज खानापूर्ति के लिए राहत बांटना है या किसी नयी व् व्यावहारिक नीति एवं निर्णय के साथ किसानों को उचित आर्थिक सहायता प्रदान करना?"

इससे पहले रोहिणी आचार्य ने तब बयान दिया था जब उन्होंने अपने पिता लालू यादव के लिए पोस्ट किया था। रोहिणी ने पिता लालू के लिए लिखा था "आपको बाय कहना मेरे लिए कभी आसान नहीं होता।"

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