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मोदी-नवाज शरीफ की दोस्ती के कारण होगा पाकिस्तान में तख्तापलट?

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jun 21, 2016 10:44 am IST,  Updated : Jun 21, 2016 10:50 am IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ की दोस्ती से पाकिस्तान में तख्तापलट के आसार बढ़ रहे हैं।

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रावलपिंडी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ की दोस्ती से पाकिस्तान में  तख्तापलट के आसार बढ़ रहे हैं। दरअसल, पिछले 2 सालों में पाकिस्तान में नवाज शरीफ शासन की छवि एक निस्सहाय सरकार की बनी है। पनामा पेपर्स में नवाज शरीफ का नाम आने के बाद स्थिति और बिगड़ी गई। फिर सर्जरी के कारण भी नवाज शरीफ अहम कामकाज से दूर हैं, जिससे पाकिस्तानी पीएम बुरी तरह से आलोचनाओं में घिर गए हैं।

इस वक्त पीएम नवाज शरीफ पाकिस्तान से बाहर हैं और पिछले हफ्ते उनकी गैरमौजूदगी में देश की आर्मी ने सरकार की क्लास ली। आर्मी ने कैबिनेट मिनिस्टर्स को हेडक्वॉर्टर रावलपिंडी बुलाया जहां जनरल राहिल शरीफ ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री के अलावा विदेशी मामलों के सलाहकार सरताज अजीज के साथ बैठक की।

इस बैठक में नवाज शरीफ और उनके आंतरिक मामलों के मंत्री को छोड़कर सारे मिनिस्टर्स मौजूद थे। इसमें विदेशी और सुरक्षा संबंधी मुद्दे पर बातचीत हुई। दरअसल, पाकिस्तान की फौज नवाज शरीफ की विदेश नीति से नाराज है। यह नाराजगी तब और बढ़ गई, जब हाल ही में नरेंद्र मोदी ने यूएस समेत 5 देशों का दौरा कर एनएसजी के लिए सपोर्ट हासिल कर लिया, जबकि पाकिस्तान इस मामले में कुछ नहीं कर पाया।

पूरी कैबिनेट को सेना की तरफ से आने के लिए कहा गया था। इससे साबित होता है कि पाकिस्तान में अहम फैसले सेना ले रही है न कि चुनी हुई सरकार। पाकिस्तान में कहा जाने लगा कि नवाज शरीफ की विदेश नीति फेल हो गई है। ऐसी आवाज आर्मी के भीतर से भी आने लगी। सेना के बढ़ते प्रभुत्व के मद्देनजर सरकार की हो रही आलोचनाओं के बीच नवाज शरीफ के विदेशी मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने सांसदों के समाने सफाई दी कि देश की विदेश नीति में सेना का कोई हस्तक्षेप नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में हमने मिलिटरी से पड़ोसी भारत से कई मसलों पर कलह के कारण पर्याप्त इनपुट्स लिए हैं। इसी वजह से हमें सेना की कठपुतली बताया जा रहा है।

विपक्षी दल पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के सांसद अली मोहम्मद खान ने नैशनल असेंबली में कहा, राजनेता जनता के प्रति जवाबदेह हैं लेकिन कोई आर्मी जनरल आता है तो उससे कोई भी सवाल नहीं पूछ सकता। हमें जनता ने चुना है और हम ही देश की नीति का निर्माण करेंगे। पाकिस्तान में लोकतंत्र समर्थकों का कहना है कि सेना की दखलअंदाजी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

आपको बता दें कि नवाज शरीफ से मोदी के मधुर संबंधों पर पाकिस्तानी सेना की नाराजगी का पहला अहसास तब हुआ, जब एक सैन्य अधिकारी नसीर खान जंजुआ को वहां का राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाया गया और भारत से रक्षा से जुड़े मुद्दों पर उन्हें वार्ता की जिम्मेवारी सौंपी गयी। इससे पहले नवाज शरीफ के बेहद विश्वस्त सरताज अजीज विदेश मंत्रालय व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार दोनों पदों की जिम्मेवारी संभाल रहे थे।

इसके अलावा पठानकोट हमले, आतंकियों की गिरफ्तारी, भारत-पाक के बीच विदेश सचिव स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता पर बार-बार बदलते नवाज शरीफ सरकार के स्टैंड से भी यह अहसास हुआ कि उन पर किसी अन्य समूह का दबाव है और यह सर्वज्ञात है कि पाकिस्तान में सेना व अतिवादी समूह ही ताकतवर समूह है।

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