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बुर्ज खलीफा में 22 अपार्टमेंट्स का मालिक है मैकेनिक रहा यह इंडियन

 Written By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Sep 11, 2016 09:01 pm IST,  Updated : Sep 11, 2016 09:08 pm IST

मैकेनिक से बिजनसमैन बना एक भारतीय आज दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा में 22 अपार्टमेंट्स का मालिक है। जॉर्ज वी. नेरीपेराम्बली नाम के इस शख्स का कहना है कि वह सिर्फ 22 पर ही नहीं रुकने वाला।

जॉर्ज वी....- India TV Hindi
जॉर्ज वी. नेरीपेराम्बली। (फोटो: facebook.com/georgevnereaparambil)

दुबई: मैकेनिक से बिजनसमैन बना एक भारतीय आज दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा में 22 अपार्टमेंट्स का मालिक है। जॉर्ज वी. नेरीपेराम्बली नाम के इस शख्स का कहना है कि वह सिर्फ 22 पर ही नहीं रुकने वाला, बल्कि अच्छी डील मिली तो वह और भी अपार्टमेंट खरीदेगा।

जॉर्ज की कहानी किसी परीकथा से कम नहीं है। कभी मैकेनिक रहे जॉर्ज आज एक कामयाब बिजनसमैन हैं। केरल में जन्मे जॉर्ज बुर्ज खलीफा के सबसे बड़े निजी मालिकों में से एक हैं। वह बताते हैं कि किसी रिश्तेदार ने उन्हें 828 मीटर उंची इस इमारत के बारे में बताते हुए चिढ़ाया था। उस घटना के बाद ही इसमें उनकी दिलचस्पी जगी। उन्होंने बताया, 'मेरे एक रिश्तेदार ने मजाकिया लहजे में कहा था कि इस बुर्ज खलीफा को देखो, तुम उसमें दाखिल नहीं हो सकते।'

बुर्ज खलीफा। (फोटो: burjkhalifa.ae)
बुर्ज खलीफा। (फोटो: burjkhalifa.ae)

जॉर्ज ने बताया कि उन्होंने 2010 में एक अखबार में बुर्ज खलीफा में एक अपार्टमेंट किराए पर देने का विज्ञापन देखा। विग्यापन देखने के बाद नेरीपेराम्बली ने उसी दिन उस अपार्टमेंट को किराए पर लिया और अगले दिन से वहीं रहने लगे। आज 6 साल बाद इस बिल्डिंग के 900 अपार्टमेंट्स में से 22 उनके नाम हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से 5 अपार्टमेंट्स को तो वह किराए पर दे चुके हैं, और बाकी के लिए सही किराएदारों का इंतजार कर रहे हैं।

नेरीपेराम्बली के जीवन की कहानी भी ट्विस्ट से भरी हुई है। 1976 में पहली बार शारजाह आने के बाद उन्हें लगा कि इस रेगिस्तानी इलाके में एयर कंडिशनिंग के बिजनस का काफी अच्छा स्कोप है। 11 साल की उम्र से ही पिता के काम में हाथ बंटानेवाले जॉर्ज नेरीपेराम्बली ने GEO Group of Companies की स्थापना की। उन्होंने बताया, 'मेरे गांव के लोग कपास बेचा करते थे, लेकिन उसके बीज को फेंक देते थे। उस समय तक ज्यादातर लोगों को पता भी नहीं था कि उन बीजों से गोंद बनाई जा सकती है।'

उन्होंने बताया कि मैंने उन फेंके हुए बीजों को इकट्ठा कर पैसा बनाना शुरू किया। जॉर्ज नेरीपेराम्बली ने कहा, 'कई बार उन्हें बेचने पर मुझे 90 फीसदी तक का मुनाफा हुआ। ठीक यही काम मैं इमली के बीजों के साथ करता था। मैं उसके खाली खोल को जानवरों के चारे के तौर पर बेच दिया करता था।'

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