लाहौर: पाकिस्तान की एक अदालत ने पंजाब सरकार और जमात-उद-दावा (जेयूडी) के वकील को निर्देश दिया कि वे 27 मार्च को उस याचिका पर अपनी आखिरी दलीलें पेश करें जिसमें मुंबई हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद और चार अन्य लोगों को आतंकवाद विरोधी कानून के तहत हिरासत में लिए जाने को चुनौती दी गई है।
- गजब जुनून: सांपों के जहर का शौकीन है यह आदमी, करता है यह काम
- OMG: 40 से 80 करोड़ टन मांस खा जाता है यह छोटा सा जीव
जेयूडी का सरगना सईद, मलिक जफर इकबाल, अब्दुर रहमान आबिद, काजी कासिफ हुसैन और अब्दुल्ला उबैद ने वकील एके डोगर के जरिए लाहौर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।
उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सैयद काजिम रजा शम्सी ने कहा कि आतंकवाद विरोधी कानून-1997 की धारा 11-EEE(1) के तहत यह जरूरी है कि सरकार किसी भी नागरिक को हिरासत में लिए जाने के कारण बताए।
सुनवाई के दौरान वकील डोगर ने कहा कि सरकार ने सईद और उसके चार साथियों को अमेरिका एवं भारत के दबाव में हिरासत में लिया था। उन्होंने आरोप लगाया, भारत ने हमेशा ही हाफिज सईद को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया है। अदालत ने मामले की सुनवाई 27 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी और याचिकाकर्ताओं के वकील तथा प्रांतीय विधि अधिकारी को निर्देश दिया कि अगली तारीख पर वे आखिरी दलीलें पेश करें।