न्यूयॉर्क: पाकिस्तान 2015 में मौत की सज़ा पर सबसे ज़्यादा अमत करने वाला दुनिया का तीसरा देश है। पाकिस्तान में पिछले साल 326 लोगों को फ़ासी दी गई। विश्व में मौत की सज़ा देने के मामले में 54 प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ है।
एमनेस्टी इंटरनैशनल के अनुसार इस फ़ेहरिस्त में सऊदी अरब नंबर एक और ईरान नंबर दो पर आता है। सारी दुनिया में 2015 में जितने लोगों को मौत की सज़ा दी गई उनमें से 90 प्रतिशत इन तीन देशों में सज़ा दी गई है।
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनैशनल के अनुसार 2015 में कम से कम 1,634 लोगों को मौत की सज़ा दी गई। 2014 में ये संख़्या 1,061 थी। इन आंकड़ों में चीन शामिल नहीं है क्योंकि वहां मौत की सज़ा को गोपनीय रखा जाता है।
एमनेस्टी इंटरनैशनल ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि मौत की सज़ा में सऊदी अरब में 76 और ईरान में 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
रिपोर्ट के मुताबिक़ ईरान और पाकिस्तान में 2015 में ऐसे लोगों को मौत की सज़ा दी गई जिनकी अपराध करते समय उम्र 18 से कम थी। दूसरे कई देशों में भी 18 साल के कम उम्र के बच्चों को मौत की सज़ा दी जाती है।
एमनेस्टी इंटरनैशनल के दक्षिण एशिया क्षैत्र की निदेशक चंपा पटेल ने बताया कि पाकिस्तान ने पिछले साल 326 लोगों को फ़ांसी दी। इनमें ज़्यादातर लोगों का आतंकवाद संबंधी अपराधों से कोई नाता नहीं था।
उन्होंने कहा, “मौत की सज़ा मानवाधिकार का हनन है लेकिन इसका जिस तरह से पाकिस्तान में इस्तेमाल हो रहा है वह चिंताजनक है। पाकिस्तान में निषप्क्ष सुनवाई नहीं होती और वकील करने की भी सुविधा नहीं मिलती।”
अमेरिका में 2015 में 28 लोगों को मौत की सज़ा दी गई।