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भारत और अफगानिस्तान के साथ इस मुद्दे पर साथ काम करेगा पाक

 Written By: India TV News Desk
 Published : May 03, 2017 01:49 pm IST,  Updated : May 03, 2017 01:49 pm IST

विकास परियोजनओं के नकारात्मक असर को न्यूनतम करने के लिए पाकिस्तान भारत और अफगानिस्तान के साथ मिलकर वाटरशेड मैनेजमेंट (जल-थल प्रबंधन) और सीमा पार एक्वीफायर (जलभर) को साझा रखने की संयुक्त प्रणाली चाह रहा है।

Pakistan will work with India and Afghanistan on water...- India TV Hindi
Pakistan will work with India and Afghanistan on water management issue

इस्लामाबाद: विकास परियोजनओं के नकारात्मक असर को न्यूनतम करने के लिए पाकिस्तान भारत और अफगानिस्तान के साथ मिलकर वाटरशेड मैनेजमेंट (जल-थल प्रबंधन) और सीमा पार एक्वीफायर (जलभर) को साझा रखने की संयुक्त प्रणाली चाह रहा है। वॉटरशेड मैनेजमेंट का संबंध जल प्रबंधन और थल प्रबंधन प्रणालियों से है। ये प्रणालियां जल की गुणवत्ता की सुरक्षा और सुधार में मदद कर सकती हैं। वहीं एक्वीफायर का अर्थ जमीन के नीचे चट्टान या खनिजों की उस परत से है, जो पानी को रोककर रखती है। (लगातार बाहर खाना है गैरकानूनी, जानिए पाकिस्तान के कुछ अजीबोगरीब कानून)

द डॉन की खबर के अनुसार, यह पाकिस्तान की राष्ट्रीय जल नीति का हिस्सा है, जो पीने और सफाई समेत शहरी पानी के 100 प्रतिशत मापन की बात कहती है। अखबार ने कहा कि सरकार और प्रांतों द्वारा जिस नीति को अंतिम रूप दिया गया है, वह कल काउंसिल ऑफ कॉमन इंटरेस्ट्स के एजेंडे में थी लेकिन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की राजनीतिक व्यस्तताओं के चलते इसे उठाया नहीं जा सका। अखबार में कहा गया कि यह नीति इस बात को स्वीकार करती है कि सिंधु जल संधि ने भारत के साथ जल के बंटवारे पर एक पूरी प्रणाली उपलब्ध करवाई लेकिन नियंत्रण रेखा के पास पन बिजली विकास से जुड़े इसके प्रावधान कम प्रवाह वाली अवधियों में पाकिस्तान के लिए जल उपलब्धता का संकट पैदा कर सकते हैं।

यह संधि अंतरराष्ट्रीय सीमा से नीचे की ओर पूर्वी नदियों के लिए- जिनका जल भारत के पास रहता है-न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह उपलब्ध नहीं करवाती, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों पर गंभीर संकट पैदा हो जाते हैं। इसमें कहा गया, दो से अधिक पड़ोसियों से जुड़ी क्षेत्रीय प्रणालियों में तलाश की जानी चाहिए ताकि सीमा पार से सर्दी के समय पानी छोड़े जाने पर या मानसून और रबी एवं खरीफ की फसल बोने के समय पानी रोके जाने की स्थिति में पाकिस्तान की बढ़ती कमजोरी का उपयुक्त समाधान निकाला जा सके। पश्चिमी नदियों पर विकास के चलते पैदा होने वाली चुनौतियों के असर के विश्लेषण के लिए भी अध्ययन होगा। इसके अलावा इस असर को न्यूनतम करने के लिए सिंधु जल संधि और अंतरराष्ट्रीय जल नियमों के तहत रहते हुए उठाए गए कदमों की भी पड़ताल होगी।

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