लाहौर: पाकिस्तान की एक अदालत ने प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और लश्कर-ए-झांगवी (एलईजे) के सात आतंकवादियों की मौत की सजा को बरकरार रखा है। सैन्य अदालतों ने विभिन्न हत्या के मामलों में उन्हें यह सजा सुनाई थी।
लाहौर उच्च न्यायालय ने मौत की सजा का सामना कर रहे सात कैदियों की रिट याचिकाओं को कल खारिज कर दिया। सैन्य अदालतों द्वारा दोषी ठहराए जाने के फैसले को इन कैदियों ने चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति अब्दुल सामी खान की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने बंद कमरे में सैन्य अदालत की कार्यवाहियों, दोषसिद्धि के रिकॉर्ड का अध्ययन करने के बाद याचिकाओं को खारिज कर दिया।
सैन्य अदालतों ने सबीर शाह, अब्दुल रउफ, अवैस गुज्जर, सुलेमान पठान, रफीउल्ला और शेख फरहान को एक वकील, एक बैंकर और पत्रकार रजा रूमी के चालक की हत्या में कथित संलिप्तताओं के लिए उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। रूमी हमले में बाल-बाल बच गए थे और अब अमेरिका में बस गए हैं। दोषियों के परिवार ने सैन्य अदालतों द्वारा दी गई सजा को गैर कानूनी बताते हुए इसे चुनौती दी थी।