संयुक्त राष्ट्र: राज्येत्तर तत्वों और आतंकवादियों द्वारा रसायनिक हथियारों को हासिल करने तथा उनका उपयोग करने को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सतर्क करते हुए भारत ने कहा है कि कहीं भी और किसी के भी द्वारा ऐसे हथियारों का उपयोग किए जाने की निंदा करनी चाहिए। संसद सदस्य अभिजीत बनर्जी ने कल संयुक्त राष्ट्र महासभा की फस्र्ट कमेटी में सामूहिक विनाश के हथियारों पर एक बहस के दौरान कहा रसायनिक हथियारों का उपयोग कहीं भी, किसी के भी द्वारा किए जाने की निंदा करनी चाहिए और रसायनिक हथियारों के उपयोग के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत ने सीरिया के घोषित रसायनिक हथियार भंडार को नष्ट करने के लिए संयुक्त राष्ट्र और परमाणु हथियार अप्रसार संगठन (OPCW) के तहत अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में योगदान दिया है। बनर्जी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को राज्येत्तर तत्वों और आतंकवादियों द्वारा रसायनिक हथियारों को हासिल करने तथा उनका उपयोग करने को लेकर सावधान रहना चाहिए। निशस्त्रीकरण को रसायनिक हथियार संधि (CWC) का प्रमुख लक्ष्य बताते हुए उन्होंने कहा कि इसके पालन के लिए देशों को जल्दी अपने दायित्व पूरे करने चाहिए। भारत ने CWC की तय समय सीमा के अनुसार, वर्ष 2009 में अपने रसायनिक हथियारों के भंडार को नष्ट करने का काम पूरा कर लिया था।
बनर्जी ने कहा कि संधि के प्रावधानों को इस तरह कार्यान्वित करना चाहिए ताकि यह खास कर भारत जैसे बड़े और बढ़ते रसायनिक उद्योग वाले देशों में जायज गतिविधियों में बाधक न बने। उन्होंने कहा कि संधि की सफलता के लिए सार्वभौमिकता मूलभूत आधार है। उन्होंने जैविक हथियार संधि (BWC) के प्रभाव में सुधार के लिए तथा इसके कार्यान्वयन को सुदृढ़ बनाने और इसकी सार्वभौमिकता के बारे में भारत की प्रतिबद्धता जाहिर की। बनर्जी ने कहा हमारा मानना है कि आतंकवादी गतिविधियों के लिए टॉक्सिन या जैविक एजेंटों तक पहुंच के लिए प्रयासरत आतंकवादियों या राज्येत्तर तत्वों के कारण आसन्न खतरे सहित प्रसार के चलन की वजह से अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए उत्पन्न नयी चुनौतियो को देखते हुए यह आवश्यक है।