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पाकिस्तान ने 4 लोगों को दी अजीबोगरीब सजा, मौत के फरमान के साथ 80 साल की कैद; फेसबुक बना कारण

Edited By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia Published : Jan 25, 2025 07:00 pm IST, Updated : Jan 25, 2025 07:00 pm IST

पाकिस्तान की एक अदालत ने 4 लोगों को फेसबुक पर एक टिप्पणी करने के चलते मौत की सजा सुनाई है। इक बेहद हैरान कर देने वाले मामले में 80 साल की कैद की सजा भी सुनाई है।

शहबाज शरीफ, पाकिस्तान के पीएम। - India TV Hindi
Image Source : AP शहबाज शरीफ, पाकिस्तान के पीएम।

लाहौर: पाकिस्तान ने 4 लोगों को एक जुर्म में अजीबोगरीब सजा सुनाई है। पाकिस्तान की एक अदालत ने चार लोगों को मौत का फरमान सुनाने के साथ ही 80 साल कैद की सजा भी दी है। यह सुनकर हर कोई हैरान हो रहा है। सबसे हैरतअंगेज बात यह है कि उन्हें मौत की सजा देने के बाद फिर 80 साल की कैद देना कैसे संभव है, इस बारे में हम आपको आगे बताएंगे, लेकिन आइये सबसे पहले बताते हैं कि कैसे फेसबुक इन चारों लोगों की मौत की वजह बन गया। 

इन चारों लोगों को ही फेसबुक पर टिप्पणी करने के चलते अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है। पाकिस्तान की एक अदालत ने फेसबुक पर ईशनिंदा वाली सामग्री साझा करने के जुर्म में इन सभी को मौत की सजा सुनाई है। साथ ही 80 साल के कैद की सजा सुनाई है। दरअसल यह सजा अलग-अलग धाराओं में मुकदमा दर्ज होने और अलग-अलग जुर्म साबित होने पर सुनाई गई है, जिसमें एक मामले में मौत और दूसरे मामले में 80 साल कैद की सजा दी गई है। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।

कौन हैं चारों दोषी

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मोहम्मद तारिक अयूब ने शुक्रवार को चार संदिग्धों - वाजिद अली, अहफाक अली साकिब, राणा उस्मान और सुलेमान साजिद को पैगंबर मुहम्मद (पीबीयूएच) और उनके सहयोगियों तथा उनकी पत्नियों का अपमान करने के लिए दोषी ठहराया। अदालत के अधिकारी ने कहा कि दोषियों ने चार अलग-अलग पहचानपत्र (आईडी) से फेसबुक पर ईशनिंदा संबंधी सामग्री अपलोड की। अधिकारी ने कहा, ‘‘न्यायाधीश ने अभियोजन एवं बचाव पक्ष, दोनों की दलीलें और गवाहों के बयान सुनने के बाद उनमें से प्रत्येक को अलग-अलग मामलों में मौत की सजा के साथ सही 80 साल कैद की सजा सुनाई।’’

अधिकारी ने बताया कि दोषियों के खिलाफ 52 लाख पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों का इस्तेमाल अक्सर धार्मिक अल्पसंख्यकों और झूठे आरोपों का निशाना बनने वाले अन्य लोगों के खिलाफ किया जाता है, यह कानून आरोपियों को धमकाने या मारने के लिए तैयार निगरानीकर्ताओं का हौसला बढ़ाता है। (भाषा)

 

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