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कनाडा विवाद पर विदेश मंत्रालय ने राज्यसभा में दिया जवाब, वाणिज्य अधिकारी ऑडियो-वीडियो निगरानी में हैं

 Edited By: Dharmendra Kumar Mishra
 Published : Nov 29, 2024 08:44 am IST,  Updated : Nov 29, 2024 08:44 am IST

भारतीय विदेश मंत्रालय ने राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के जवाब में कनाडा में भारतीय कांसुलर कर्मियों के बारे में जानकारी दी है। एमईए ने बताया कि कनाडाई अधिकारी उन्हें ऑडियो-वीडियो निगरानी में रखने की बात कह रहे हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (फाइल फोटो)- India TV Hindi
पीएम नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (फाइल फोटो) Image Source : AP

नई दिल्लीः भारतीय विदेश मंत्रालय ने कनाडा से चल रहे विवाद के बीच भारतीय वाणिज्य दूतावास के कांसुलर अधिकारियों को लेकर स्थिति साफ की है। विदेश मंत्रालय ने

राज्यसभा में कहा, "स्थिर द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक-दूसरे की चिंताओं, क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान आवश्यक है। "वैंकूवर में भारतीय वाणिज्य दूतावास के कांसुलर अधिकारियों को हाल ही में कनाडाई अधिकारियों द्वारा सूचित किया गया था कि वे "ऑडियो और वीडियो निगरानी" के तहत हैं। उनके "निजी संचार" को भी "अवरुद्ध" कर दिया गया है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में एक लिखित जवाब में यह भी कहा, "स्थिर द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक-दूसरे की चिंताओं, क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान आवश्यक है"।

उनसे पूछा गया था कि क्या कनाडा में भारतीय राजनयिकों को निशाना बनाकर साइबर निगरानी या अन्य प्रकार की निगरानी का कोई मामला है। इस पर उन्होंने कहा कि हां, हाल ही में, वैंकूवर में भारतीय वाणिज्य दूतावास के कांसुलर अधिकारियों को कनाडाई अधिकारियों द्वारा सूचित किया गया था कि वे ऑडियो और वीडियो निगरानी में हैं और जारी रहेंगे और उनके निजी संचार को भी रोक दिया गया है। सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, “भारत सरकार ने 2 नवंबर, 2024 को अपने नोट वर्बेल के माध्यम से इस मुद्दे पर नई दिल्ली में कनाडाई उच्चायोग के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया। क्योंकि ये कार्रवाई सभी राजनयिक प्रावधानों का घोर उल्लंघन थी।”

उग्रवाद और हिंसा के माहौल में हैं कान्सुलरकर्मी

मंत्री ने अपने जवाब में हाल ही में यहां मीडिया को अपनी साप्ताहिक ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता की प्रतिक्रिया का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी बातों का हवाला देकर कनाडाई सरकार इस तथ्य को उचित नहीं ठहरा सकती और उन्हें उत्पीड़न और धमकी में नहीं रख सकती। हमारे राजनयिक और कांसुलर कर्मी पहले से ही उग्रवाद और हिंसा के माहौल में काम कर रहे हैं।

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