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चीन से भी बड़ा "मैन्युफैक्चरर" बनने की राह पर है भारत, वैश्विक निर्माताओं के अनुमान से घबराया ड्रैगन

 Written By: Dharmendra Kumar Mishra
 Published : Jan 23, 2023 01:14 pm IST,  Updated : Jan 24, 2023 06:43 am IST

India on The Way to Global Manufacturer: वैश्विक निर्माताओं ने भारत में तेज औद्योगिक विकास की बड़ी भविष्यवाणी करके चीन समेत दुनिया के तमाम देशों को हैरानी में डाल दिया है। साउथ चाइन मॉर्निंग पोस्ट में सप्लाई चेन एनालिस्टों की प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक निर्माता भारत को बदलाव के ऐसे कगार पर खड़ा देख रहे हैं।

नरेंद्र मोदी, भारत के प्रधानमंत्री- India TV Hindi
नरेंद्र मोदी, भारत के प्रधानमंत्री Image Source : FILE

India on The Way to Global Manufacturer: वैश्विक निर्माताओं ने भारत में तेज औद्योगिक विकास की बड़ी भविष्यवाणी करके चीन समेत दुनिया के तमाम देशों को हैरानी में डाल दिया है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में सप्लाई चेन एनालिस्टों की प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक निर्माता भारत को बदलाव के ऐसे कगार पर खड़ा देख रहे हैं, जो चीन से भी ज्यादा परे है। आपूर्ति श्रृंखला के विश्लेषकों का दावा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2014 में जब से देश में "मेक इन इंडिया" का मंत्र फूंका है, तब से भारत के आर्थिक विकास ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। दावा है कि इस दौरान भारत में "आर्थिक परिवर्तन" सबसे "टॉप गेयर" में पैर चला रहा है।

विश्लेषकों ने भारत में तेज आर्थिक विकास के पीछे "मेक इन इंडिया" के अलावा चीन और अमेरिका के बीच प्रतिद्वंदिता को भी बड़ी वजह बताया है। उनका कहना है कि यूएस-चीन की प्रतिद्वंदिता ने भारत को इसके लिए टेलविंड प्रदान करने का काम किया है। पीएम मोदी ने जब "मेक इन इंडिया" का आगाज किया था तो उस दौरान चीन के साथ ही साथ साउथ-ईस्ट एशिया में विकास के टाइगर कहे जाने वाले सिंगापुर और दक्षिण कोरिया की राह पर चलने का विजन भी था। यही वजह है कि अब भारत को वैश्विक निर्माता चीन से परे देख रहे हैं।

पीएम मोदी का बढ़ रहा दुनिया में जलवा

विश्लेषकों के अनुसार भारत को टॉप गेयर में लाने के बाद पीएम मोदी की धाक दुनिया पर जमती जा रही है। वह ऐसे पलों पर कब्जा भी करते जा रहे हैं। इसका जीता जागता एक उदाहरण यह भी है कि सरकार इस वर्ष अपने कुल बजट का करीब 20 फीसदी सिर्फ पूंजी निवेश पर खर्च करने जा रही है। यह राशि भारत के इतिहास में पिछले एक दशक में इन्वेस्टमेंट के लिहाज से सबसे ज्यादा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हाल ही में सर्वाधिक जनसंख्या के मामले में चीन को पीछे छोड़ देने वाले भारत के लिए प्रधानमंत्री मोदी अपने पूर्ववर्तियों की तुलना में सबसे अधिक मजबूती से यह दावा करने में सक्षम हो गए हैं कि वह अपने देश की जरूरतों को पूरा करने के लिए आर्थिक क्षमताओं को तेजी से बढ़ा रहे हैं।

बदलाव के बड़े मुहाने पर भारत
भारत की सबसे बड़ी प्रौद्योगिकी सेवा कंपनियों में से एक इंफोसिस के संस्थापक नंदन नीलेकणि ने कहाकि "भारत बड़े बदलाव के मुहाने पर है।" उन्होंने कहा कि भारत ने तेजी से दसियों हजार स्टार्ट-अप किए हैं। साथ ही एक अरब से अधिक स्मार्टफोन उपभोक्ताओं को दुनिया में सबसे कम दर पर डेटा भी उपलब्ध कराया है। यूएस-चीन प्रतिद्वंद्विता भारत को एक टेलविंड प्रदान कर रही है। आपूर्ति श्रृंखला के विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक कंपनियों के "चीन-प्लस-वन" रणनीति की ओर बढ़ने के कारण भारत और वियतनाम इसके सबसे बड़े लाभार्थी होंगे। हाल ही में Apple के तीन प्रमुख ताइवानी आपूर्तिकर्ताओं ने स्मार्टफोन उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार से प्रोत्साहन प्राप्त किया है। लिहाजा अप्रैल से दिसंबर के बीच आइफोन का शिपमेंट दोगुने से भी ज्यादा बढ़कर 2.5 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है। नंदन नीलकेणि ने कहा कि अगले दशक में पूंजी लगाने के लिए सबसे अच्छी जगहों में "मैंने पिछले 15 सालों में भारत में इस तरह की दिलचस्पी नहीं देखी है।

G20 की अध्यक्षता में भारत खुद को कर रहा स्थापित
भारत में अमेरिका के राजदूत केनेथ जस्टर ने कहा कि अनुसार G20 की अध्यक्षता में भारत खुद को स्थापित कर रहा है। वह पूर्व और पश्चिम व उत्तर और दक्षिण के बीच एक बड़े सेतु का काम कर रहा है।  इस साल 20 देशों के समूह के अध्यक्ष के रूप में भारत के पास गति है। कई गठजोड़ और अप्राप्य स्व-हित पर बनी एक बाहरी रणनीति ने राष्ट्र को वाशिंगटन के दबाव को नज़रअंदाज़ करते हुए रूसी तेल की खरीद को 33 गुना बढ़ा दिया है। जब पड़ोसी चीन के साथ तनावपूर्ण संबंधों की बात आती है तो व्यावहारिकता के कुछ संकेत भी मिलते हैं। क्योंकि हाल ही में Apple के एक दर्जन से अधिक चीनी आपूर्तिकर्ताओं को संचालन का विस्तार करने के लिए नई दिल्ली से प्रारंभिक मंजूरी मिल रही है, जो तकनीकी दिग्गज के भारत में उत्पादन को मोड़ने के प्रयासों को रेखांकित करता है। केनेथ ने कहा कि एक बहुध्रुवीय दुनिया में भारत के मध्यम मार्ग को अपनाने से एक राष्ट्र के रूप में उसकी छवि मजबूत हुई है, "जिसके साथ हर कोई अच्छे संबंध बनाने में रुचि रखता है।"

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