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रक्षा नीति में बदलाव के संकेत, भारत ने खाली किया ताजिकिस्तान में स्थित अयनी एयरबेस

Edited By: Amit Mishra @AmitMishra64927 Published : Oct 29, 2025 12:01 pm IST, Updated : Oct 29, 2025 12:01 pm IST

भारत ने ताजिकिस्तान में स्थित अयनी एयरबेस को खाली कर दिया है। करीब 25 सालों की मौजूदगी के बाद भारत ने यह उठाया है। अयनी एयरबेस को सामरिक लिहाज से भारत के लिए बेहद अहम था।

Indian Air Force- India TV Hindi
Image Source : @IAF_MCCय/ X Indian Air Force

India Vacates Air Base In Tajikistan: भारत ने ताजिकिस्तान में स्थित अयनी एयरबेस खाली कर दिया है। लगभग 25 वर्षों से भारत इस एयरबेस का संचालन कर रहा था। अयनी एयरबेस भारतीय सैन्य अभियानों के लिए एक अहम केंद्र माना जाता था। अयनी एयरबेस ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस बेस का निर्माण सोवियत संघ के समय में हुआ था, लेकिन 1991 में सोवियत विघटन के बाद यह बेस ताजिकिस्तान सरकार के नियंत्रण में चला गया। 2002 में भारत और ताजिकिस्तान के बीच एक रणनीतिक समझौता हुआ, जिसके तहत भारत ने इस एयरबेस के पुनर्निर्माण और आधुनिकीकरण का काम अपने हाथों में लिया। भारतीय वायुसेना ने यहां MiG-29 फाइटर जेट्स, हेलीकॉप्टर, हैंगर और रनवे सिस्टम को अपग्रेड किया। इस बेस ने मध्य एशिया में भारत की मौजूदगी को मजबूत किया है।

भारत को था सामरिक लाभ

अयनी एयरबेस पर भारत की मौजूदगी से भारत को कई सामरिक लाभ थे। यह बेस अफगानिस्तान की उत्तरी सीमा से महज 100 किलोमीटर की दूरी पर था जिससे भारत की अफगानिस्तान के पास नजदीकी बनी हुई थी। भारत इस ठिकाने से पाकिस्तान की गतिविधियों पर भी निगरानी रख सकता था। इतना ही नहीं ताजिकिस्तान की सीमा चीन के शिंजियांग प्रांत से लगती है, इसलिए यह बेस भारत के लिए चीन की गतिविधियों पर नजर रखने का भी केंद्र था।

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Image Source : @IAF_MCC/X
Indian Air Force

ताजिकिस्तान की राजनीति और भारत की नई रक्षा रणनीति

ताजिकिस्तान सरकार ने हाल के वर्षों में विदेशी सैनिकों पर प्रतिबंध कड़ा किया है। राष्ट्रपति इमामोली रहमान नहीं चाहते कि देश के भीतर कोई विदेशी सेना लंबे समय तक रहे। इसके अलावा भारत अब अपनी रक्षा रणनीति में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है। अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ क्वाड गठबंधन के तहत भारत की प्राथमिकता समुद्री सुरक्षा पर है ना कि मध्य एशिया में स्थायी ठिकानों पर। इसलिए अयनी बेस को छोड़ना भारत की दीर्घकालिक रणनीति के अनुरूप भी माना जा सकता है।

रक्षा रणनीति में बदलाव के संकेत 

भारत अभी भी ताजिकिस्तान के साथ रक्षा और खुफिया सहयोग बनाए रखे हुए है। इसके अलावा, भारत चाबहार बंदरगाह (ईरान) और उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे जैसे प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है, जो मध्य एशिया तक भारत की पहुंच बनाए रखते हैं। अयनी एयरबेस का खाली होना भारत की विदेश नीति और रक्षा रणनीति में एक बदलाव का संकेत है। अब भारत जमीन पर नहीं बल्कि कूटनीतिक, तकनीकी और समुद्री शक्ति के माध्यम से अपने हितों की रक्षा कर रहा है। हालांकि, यह कदम प्रतीकात्मक रूप से मध्य एशिया में भारत की पकड़ को कमजोर दिखा सकता है, लेकिन यह संतुलित रणनीति का हिस्सा भी है। भारत प्रत्यक्ष टकराव से बचते हुए वैश्विक साझेदारी और प्रभाव क्षेत्र को नए ढंग से परिभाषित कर रहा है।

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