तेल अवीव: इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद के चीफ डेविड बार्निया ने कहा है कि ईरान के खिलाफ जारी जंग तब तक खत्म नहीं मानी जाएगी, जब तक वहां की मौजूदा ‘कट्टरपंथी सरकार’ खत्म नहीं हो जाती। उन्होंने यह बयान होलोकॉस्ट स्मरण दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में दिया। बार्निया ने कहा, 'हमारी प्रतिबद्धता तभी पूरी होगी, जब यह चरमपंथी शासन बदल दिया जाएगा। यह वही शासन है जो हमारे विनाश की बात करता है, इसलिए इसका दुनिया से खत्म होना जरूरी है। हमारा मिशन अभी पूरा नहीं हुआ है।'
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'सीजफायर का मतलब यह नहीं है कि मिशन समाप्त हो गया'
मोसाद के चीफ ने यह भी साफ किया कि फिलहाल हुए सीजफायर का मतलब यह नहीं है कि मिशन समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा, 'हमने कभी नहीं सोचा था कि यह मिशन लड़ाई खत्म होते ही पूरा हो जाएगा। हमने इस अभियान को लंबे समय तक चलने वाला मानकर ही योजना बनाई थी।' मोसाद प्रमुख का कार्यकाल 2 जून को खत्म हो रहा है। वह 5 साल तक इस पद पर रहे। उनकी जगह मेजर जनरल रोमन गोफमैन को अगला चीफ नियुक्त किया गया है, जो फिलहाल प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सैन्य सचिव हैं।
'इजरायल ने आखिरकार सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपनाया'
बार्निया ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइलों के जखीरे को इजरायल के लिए बड़ा खतरा बताया। उन्होंने कहा, 'हमने कई बार चेतावनी दी कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम हमारे अस्तित्व के लिए खतरा है और उसकी मिसाइलें पूरे देश में नागरिकों को निशाना बना सकती हैं।' उन्होंने बताया कि इजरायल ने आखिरकार सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपनाया। उन्होंने जून 2025 में ईरान पर किए गए 12 दिन के हवाई हमलों और हाल ही में अमेरिका के साथ मिलकर किए गए हमलों को 'जरूरी युद्ध' बताया।
'आज के समय में भी हो सकती हैं होलोकॉस्ट जैसी घटनाएं'
बार्निया ने कहा, 'आखिरकार हमने अपनी किस्मत खुद अपने हाथ में ली। दुनिया के सबसे ताकतवर देश के साथ मजबूत साझेदारी में हमने न्याय और स्वतंत्रता के मूल्यों के लिए लड़ाई लड़ी।' बार्निया ने होलोकॉस्ट का जिक्र करते हुए कहा कि जो लोग यह मानते हैं कि आज के समय में नरसंहार जैसी घटनाएं नहीं हो सकतीं, वे गलत हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मौजूदा लड़ाई के दौरान मोसाद के एजेंट ईरान के अंदर तक सक्रिय रहे। उन्होंने कहा, 'मोसाद ने एक बार फिर तेहरान के अंदर काम किया। हमने इजरायली वायुसेना को सटीक खुफिया जानकारी दी और उन मिसाइलों को निशाना बनाया जो हमारे नागरिकों के लिए खतरा थीं।'