Japan Tsunami: 11 मार्च 2011 ये वो तारीख है जो दुनिया के इतिहास में हमेशा एक भयावह याद के रूप में दर्ज रहेगी। इस दिन जापान में आई सुनामी की तुलना लोग प्रलय से करते हैं। इस दिन समुद्र ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया जिसे देखकर हर कोई सिहर उठा था। कुछ ही मिनटों में हजारों जिंदगियां खत्म हो गईं, शहर के शहर पानी में समा गए और इंसानी ताकत प्रकृति के सामने बौनी नजर आई थी।
अपने-अपने काम में व्यस्त थे लोग
11 मार्च की शुरुआत जापान में आम दिनों की तरह ही हुई थी। लोग अपने-अपने काम में व्यस्त थे। कोई दफ्तर में काम कर रहा था, बच्चे स्कूलों में थे, बाजारों में चहल-पहल थी। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही देर में प्रकृति ऐसा कहर बरपाने वाली है जिसे देखकर दुनिया हैरान रह जाएगी।
हिलने लगी धरती
दोपहर करीब 2 बजकर 46 मिनट पर जापान में अचानक धरती जोर-जोर से कांपने लगी। यह कोई मामूली भूकंप नहीं था, बल्कि 9.0 तीव्रता का एक भयानक भूकंप था। जापान के इतिहास का यह सबसे शक्तिशाली भूकंप था। इमारतें हिलने लगीं, सड़कें फट गईं और लोग घबराकर घरों और दफ्तरों से बाहर भागने लगे।

असली तबाही तो अभी बाकी थी
भूकंप का झटका इतना तेज था कि कई मिनट तक जमीन हिलती रही। लोग समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर हो क्या रहा है। लेकिन, असली तबाही तो अभी बाकी थी। भूकंप के कुछ ही समय बाद समुद्र ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया। समुद्र का पानी अचानक पीछे हटने लगा, जो सुनामी का सबसे बड़ा संकेत होता है।
दिखा लहरों का रौद्र रूप
भूकंप के बाद समुद्र की विशाल लहरें तेजी से तट की ओर बढ़ती दिखाई दीं। देखते ही देखते 30 से 40 फीट ऊंची लहरें तट से टकराईं और अपने साथ सबकुछ बहा ले गईं। कारें खिलौनों की तरह बहने लगीं, बड़े-बड़े जहाज सड़कों पर आ गए, घर और इमारतें पानी के सामने तिनके की तरह बह गए।
लहरों के सामने कोई टिक ना सका
टीवी चैनलों पर दिख रहे दृश्य इतने भयावह थे कि उन्हें देखकर दुनिया दंग रह गई। कैमरों में कैद तस्वीरों में साफ दिख रहा था कि कैसे लहरों ने शहरों को निगल लिया। खेत, सड़कें, पुल, मकान जो भी सामने आया बर्बाद हो गया। जापान के Sendai, Miyagi और Fukushima जैसे शहर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। यहां पूरा इलाका पानी में डूब गया। लोग अपनी जान बचाने के लिए इमारतों की छतों पर चढ़ गए, लेकिन कई जगहों पर पानी इतना तेज था कि मजबूत इमारतें भी ढह गईं।

मदद के लिए चिल्ला रहे थे लोग
सुनामी की लहरें इतनी ताकतवर थीं कि उन्होंने हवाई अड्डों, रेलवे लाइनों और हाईवे को भी पूरी तरह तबाह कर दिया। Sendai Airport पूरी तरह पानी में डूब गया। सैकड़ों विमान और वाहन पानी में फंस गए। उस दिन का मंजर डरावनी फिल्म जैसा था। हर तरफ सिर्फ पानी ही पानी था। लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे।
न्यूक्लियर रेडिएशन का खतरा
इस भयानक तबाही के साथ एक और बड़ी त्रासदी सामने आई और फुकुशिमा दाइची परमाणु ऊर्जा संयंत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ। सुनामी की लहरों ने इस परमाणु संयंत्र को भी नुकसान पहुंचाया, जिससे वहां रेडिएशन का खतरा पैदा हो गया। यह हादसा दुनिया के सबसे बड़े परमाणु हादसों में से एक बन गया। जापान सरकार ने तुरंत हजारों लोगों को उस इलाके से बाहर निकालना शुरू कर दिया। आसपास के गांव और शहर खाली करा लिए गए। लोगों को डर था कि रेडिएशन का असर आने वाले कई सालों तक बना रह सकता है। इस आपदा में लगभग 20 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई या वो लापता हो गए, हजारों लोग बेघर हो गए।
आज भी सिहर उठते हैं लोग
आज भी जब 11 मार्च आता है तो जापान के लोग इस दिन को याद करते हैं। पूरे देश में श्रद्धांजलि दी जाती है और उन लोगों को याद किया जाता है जिन्होंने उस प्रलयंकारी आपदा में अपनी जान गंवाई। यही कारण है कि जापान में आई उस सुनामी को लोग प्रलय कहते हैं। इस दिन समुद्र ने ऐसी तबाही मचाई थी जिसे देखकर लगा मानो दुनिया खत्म हो रही हो।
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