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भारत के इस पड़ोसी देश में डोली धरती, महसूस किए गए भूकंप के झटके; जानें कितनी रही तीव्रता

 Published : Apr 01, 2026 12:22 pm IST,  Updated : Apr 01, 2026 12:40 pm IST

नेपाल में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.0 मापी गई है। भूकंप का केंद्र मुगु जिले के धैनाकोट में था।

Earthquake- India TV Hindi
Earthquake Image Source : INDIA TV

Nepal Earthquake: नेपाल में एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए हैं। अधिकारियों ने बताया कि बुधवार तड़के नेपाल के करनाली प्रांत के पहाड़ी जिले मुगु में रिक्टर पैमाने पर 4.0 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप से अभी तक किसी तरह के नुकसान की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। भूकंप निगरानी और अनुसंधान केंद्र के अनुसार इसका केंद्र मुगु जिले के धैनाकोट में था। भूकंप के झटके पड़ोसी जिलों हुमला, जुमला और कालिकोट में भी महसूस किए गए हैं।

29 मार्च को भी डोली थी धरती

इससे पहले 29 मार्च 2026 को नेपाल के सिन्धुपालचोक जिले में भूकंप आया था। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.5 मापी गई थी। इस भूकंप का केंद्र सिन्धुपालचोक जिले के नुल्थाला खर्का क्षेत्र के पास था, जो काठमांडू से लगभग 80 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है। भूकंप के झटके राजधानी काठमांडू समेत अन्य पड़ोसी जिलों में भी महसूस किए गए थे।

भूकंप के लिहाज से संवेदनशील है नेपाल

बता दें कि, भूकंप के लिहाज से नेपाल दुनिया के सबसे संवेदनशील देशों में से एक है। यह हिमालय पर्वत श्रृंखला के नीचे स्थित है, जहां भारतीय टेक्टोनिक प्लेट और यूरेशियन (तिब्बती) प्लेट आपस में टकरा रही हैं। इस टकराव के कारण नेपाल में हर साल सैकड़ों छोटे-बड़े भूकंप आते हैं और बड़े विनाशकारी भूकंपों की संभावना हमेशा बनी रहती है। नेपाल का पूरा क्षेत्र उच्च भूकंपीय जोखिम क्षेत्र में आता है और यहां 92 से अधिक सक्रिय फॉल्ट लाइनें मौजूद हैं।

क्यों आते हैं भूकंप?

देखने में पृथ्वी स्थिर और मजबूत दिखती है, लेकिन अंदर उसमें लगातार हलचल चल रही होती है। इसी हलचल के कारण भूकंप आते हैं। पृथ्वी कई परतों से मिलकर बनी है। हम जिस पर रहते हैं, वह सबसे ऊपरी परत है, जिसे क्रस्ट कहते हैं। इस क्रस्ट को कई बड़े-बड़े टुकड़ों में बांटा गया है, जिन्हें टेक्टोनिक प्लेट्स कहा जाता है। पूरी दुनिया में मुख्य रूप से 7 बड़ी टेक्टोनिक प्लेट्स हैं। ये प्लेट्स बहुत धीरे-धीरे एक-दूसरे के साथ, एक-दूसरे के नीचे या एक-दूसरे से दूर सरकती रहती हैं। जब ये प्लेट्स कहीं अटक जाती हैं, तो उनके बीच भारी दबाव बनने लगता है। जब यह दबाव बहुत अधिक हो जाता है, तो अचानक बहुत सारी ऊर्जा बाहर निकलती है। यह ऊर्जा भूकंपीय तरंगों के रूप में चारों तरफ फैलती है और धरती को जोर से हिला देती है। इसी को हम भूकंप कहते हैं।

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