Highlights
- नेपाल में बाढ़ के बाद ड्रोन से कई इलाकों में लापता लोगों की तलाश में मदद मिली।
- 12 हाइड्रोपावर परियोजनाओं से करीब 900 कर्मचारी अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
- मिट्टी और मलबे से भरी घुमावदार सुरंगों में ड्रोन से तलाश बेहद मुश्किल हो रही है।
काठमांडू: नेपाल में पिछले हफ्ते आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान जारी है। इस अभियान में ड्रोन ने कई लोगों को खोजने में अहम मदद की है। ड्रोन पायलट मनीष महर्जन ने बताया कि उन्होंने पहाड़ी इलाकों में फंसे लोगों की तलाश के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया। उन्होंने बताया कि कई जगह ड्रोन में लगे स्पीकर से लोगों को आवाज लगाई गई और कुछ जगह संगीत भी बजाया गया, ताकि फंसे लोगों की ओर से कोई जवाब मिल सके। उन्होंने बताया कि यह तरीका कई जगह कारगर साबित हुआ।
बाढ़ के एक दिन बाद ही बचाव कार्य में जुटे मनीष
पेशे से फिल्म निर्माता मनीष महर्जन ने 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ के एक दिन बाद नेपाली सेना के बचाव अभियान में हिस्सा लिया। उनके मुताबिक, स्पीकर के जरिए लोगों को पुकारने और संगीत बजाने का तरीका कुछ जगहों पर काम आया और इससे फंसे लोगों की लोकेशन पता लगाने में मदद मिली। हालांकि, बिजली परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे सैकड़ों कर्मचारियों को खोजने की चुनौती बिल्कुल अलग है। यहां ड्रोन के जरिए तलाश करना भी बेहद मुश्किल हो रहा है।
सुरंगों में मिट्टी और मलबा भरने से बढ़ी मुश्किल
महर्जन ने बताया कि कई सुरंगों में मिट्टी इस तरह भर गई है, जैसे किसी ट्यूब के अंदर टूथपेस्ट पूरी तरह भर गया हो। यानी सुरंगों के अंदर खाली जगह ही नहीं बची है, जहां कोई व्यक्ति जिंदा फंसा हो या ड्रोन आसानी से आगे बढ़ सके। उन्होंने कहा,
'हमने पाया कि सुरंगें टूथपेस्ट की ट्यूब की तरह मिट्टी से पूरी तरह भर गई थीं। अंदर कोई खोखली या खाली जगह नहीं थी।'
ड्रोन पायलट के मुताबिक, वह सुरंगों के अंदर थर्मल ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये ड्रोन गर्मी के आधार पर किसी इंसान या दूसरी चीज की मौजूदगी का पता लगाने में मदद कर सकते हैं।
लोगों को खोजने में सामने आ रही हैं कई दिक्कतें
मनीष ने बताया कि सुरंगों का रास्ता अगर सीधा और लंबा हो, तभी ड्रोन को अंदर उड़ाना आसान है, और जहां कहीं भी मोड़ वगैरह आता है तो मुश्किल पेश आती है। उन्होंने कहा,
'मैं ड्रोन को सिर्फ उन्हीं सुरंगों में उड़ा सकता हूं जो लंबी और सीधी हों। जैसे ही सुरंग में मोड़, घुमाव या टेढ़ा-मेढ़ा रास्ता आता है, ड्रोन चलाना और प्रभावी तरीके से तलाश करना बहुत मुश्किल हो जाता है।'
26 अगस्त को ग्लेशियर के ढहने से आई थी बाढ़
बता दें कि 26 अगस्त की बाढ़ एक ग्लेशियर के ढहने के बाद अचानक आई पानी की तेज धार के कारण आई थी। इसने नेपाल और तिब्बत में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। बाढ़ में सड़कें, इमारतें, पुल और जलविद्युत परियोजनाओं समेत जरूरी बुनियादी ढांचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है। यह आपदा तेजी से गर्म हो रहे हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते खतरों का एक और संकेत मानी जा रही है। बाढ़ में अब तक एक हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता हैं।
हाइड्रोपावर परियोजनाओं के कई कर्मचारी लापता
जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले लोगों की तलाश बचाव अभियान का एक बड़ा केंद्र बन गई है। करीब 12 हाइड्रोपावर परियोजनाओं से 900 कर्मचारी अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें से करीब 500 लोगों के पावर प्लांट की सुरंगों के अंदर फंसे होने की आशंका है। इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहन कुमार दांगी के मुताबिक, आपदा के समय सुरंगों में मौजूद कुछ कर्मचारियों ने मदद के लिए फोन किया था। हालांकि, शुरुआती फोन कॉल के बाद से बचाव दल का उन कर्मचारियों से संपर्क हुआ है या नहीं, यह साफ नहीं है।
समय बीतने के साथ मुश्किल होती जा रही तलाश
बचावकर्मियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब समय भी है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, सुरंगों में फंसे लोगों का पता लगाना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना मुश्किल होता जा रहा है। महर्जन ने बताया कि उन्होंने सोमवार को रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना की सुरंग के अंदर ड्रोन भेजा। ड्रोन को सुरंग के काफी अंदर तक और उसके आखिरी हिस्से तक ले जाया गया, लेकिन वहां किसी व्यक्ति के जिंदा होने का कोई संकेत नहीं मिला। उन्होंने कहा,
'हमने बार-बार जांच की, लेकिन सुरंग मिट्टी और मलबे से भरी हुई थी। उसे देखकर मैं सिर्फ बाढ़ की ताकत का अंदाजा लगा सकता था।'
नेपाल में बचाव दल अब उन इलाकों पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं जहां लापता कर्मचारियों के सुरंगों में फंसे होने की आशंका है। (AP से इनपुट्स के साथ)
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