1. Hindi News
  2. विदेश
  3. एशिया
  4. बन गया इस्लामिक नाटो! पाकिस्तान-सऊदी अरब-तुर्किये ने संयुक्त रक्षा समझौते पर किए हस्ताक्षर, 'एक पर हमला मतलब सभी पर अटैक'

बन गया इस्लामिक नाटो! पाकिस्तान-सऊदी अरब-तुर्किये ने संयुक्त रक्षा समझौते पर किए हस्ताक्षर, 'एक पर हमला मतलब सभी पर अटैक'

 Written By: Amar Deep
 Published : Aug 07, 2026 05:36 pm IST,  Updated : Aug 07, 2026 05:44 pm IST

पाकिस्तान-सऊदी अरब-तुर्किये ने संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसे 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौता' नाम दिया गया है। इसके तहत किसी एक देश पर हमला मतलब सभी पर अटैक माना जाएगा।

पाकिस्तान-सऊदी अरब-तुर्किये ने संयुक्त रक्षा समझौते पर किए हस्ताक्षर।- India TV Hindi
पाकिस्तान-सऊदी अरब-तुर्किये ने संयुक्त रक्षा समझौते पर किए हस्ताक्षर। Image Source : X/SPA_ENG

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने शुक्रवार को एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत, तीनों देशों में से किसी एक पर भी हमला होने पर उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। एक संयुक्त बयान के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने मक्का के अल-सफा पैलेस में हुई बैठक के दौरान 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' पर हस्ताक्षर किए।

मक्का संयुक्त रक्षा समझौते का उद्देश्य

संयुक्त रक्षा के लिए मक्का अल-मुकर्रमा शिखर सम्मेलन के दौरान हस्ताक्षरित इस समझौते का उद्देश्य किसी भी आक्रामक कार्रवाई के खिलाफ सामूहिक सुरक्षा को मजबूत करना है। इसमें यह प्रावधान है कि तीनों देशों में से किसी एक पर भी सशस्त्र हमला होने पर उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। बयान में कहा गया है कि इसमें तीनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के सभी पहलुओं को बढ़ाने का भी प्रावधान है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया का संघर्ष कई मोर्चों पर फैल गया है, जिसमें लाल सागर और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट शामिल हैं। इससे खाड़ी देशों को क्षेत्रीय सुरक्षा समन्वय मजबूत करने के लिए प्रेरित होना पड़ा है। बयान में कहा गया है कि मक्का समझौता "तीनों देशों की सामूहिक सुरक्षा को और मजबूत करने तथा क्षेत्र और उससे बाहर शांति, सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है, ताकि एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।" 

पाकिस्तान-सऊदी अरब के बीच रक्षा समझौता

बता दें इससे पहले पिछले साल सितंबर में, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने "स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट" (रणनीतिक आपसी रक्षा समझौता) पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें वादा किया गया था कि किसी भी देश पर हमले को "दोनों देशों के खिलाफ आक्रामकता" माना जाएगा। इस रक्षा समझौते के तहत, पाकिस्तान ने संयुक्त प्रशिक्षण, रक्षा सहयोग और सऊदी अरब की सुरक्षा जरूरतों में मदद के लिए वहां अपने सैनिक और विमान भेजे थे। संयुक्त बयान में कहा गया है कि मक्का समझौता "तीनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक संबंधों से प्रेरित है। यह भाईचारे और इस्लामी एकजुटता के मजबूत बंधनों पर आधारित है जो उन्हें जोड़ते हैं, और यह उनके साझा रणनीतिक हितों और लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग को और आगे बढ़ाता है।"

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच हुआ समझौता

शुक्रवार को हुई बैठक में तीनों पक्षों ने अपने संबंधों की समीक्षा की और आपसी हित के कई मुद्दों पर चर्चा की। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि बैठक से पहले, प्रधानमंत्री शरीफ और रक्षा बलों के प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर - जो गुरुवार को तीन दिन की आधिकारिक यात्रा पर यहां पहुंचे थे - ने सऊदी क्राउन प्रिंस से मुलाकात की। कार्यालय ने बताया कि शरीफ के साथ उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार और रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ भी मौजूद थे। विदेश कार्यालय ने गुरुवार को कहा था, "हालांकि यह यात्रा खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच हो रही है, लेकिन इसका महत्व तात्कालिक संकट और अल्पकालिक विचारों से कहीं अधिक है। इससे द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे, रणनीतिक सहयोग गहरा होगा, आपसी हित के क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर तालमेल बढ़ेगा और बहुपक्षीय सहयोग को भी मजबूती मिलेगी।"

यह भी पढ़ें-

सूडान में जारी जंग में पाकिस्तान का भी हाथ? बलोच पीपुल्स कांग्रेस ने 'सबूत' के साथ लगाए आरोप

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Asia से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें विदेश