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30 सितंबर से 2 अक्टूबर तक श्रीलंका में होगा सार्क विरासत मंच का आयोजन

 Reported By: Vijai Laxmi, Edited By: Amit Mishra
 Published : Sep 25, 2025 01:16 pm IST,  Updated : Sep 25, 2025 01:16 pm IST

धार्मिक तीर्थयात्राओं को प्रोत्साहित करने और सार्क समुदायों के बीच अंतर-सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देने के मकसद से श्रीलंका का सार्क सांस्कृतिक केंद्र सार्क विरासत मंच का आयोजन करेगा।

Sri Lanka Annual SAARC Heritage Forum- India TV Hindi
Sri Lanka Annual SAARC Heritage Forum Image Source : SAARC HERITAGE FORUM

Sri Lanka Annual SAARC Heritage Forum: श्रीलंका का सार्क सांस्कृतिक केंद्र 30 सितंबर से 2 अक्टूबर तक वार्षिक सार्क विरासत मंच का आयोजन करेगा। यह क्षेत्र में सांस्कृतिक विरासत में क्षेत्रीय सहयोग को संस्थागत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

कब हुई थी सार्क विरासत मंच की स्थापना?

सार्क विरासत मंच, सितंबर 2014 में नई दिल्ली में आयोजित सार्क संस्कृति मंत्रियों की बैठक और अक्टूबर 2014 में नेपाल के काठमांडू में आयोजित 18वें सार्क शिखर सम्मेलन में राष्ट्राध्यक्षों की शिखर बैठक की घोषणा के निर्देशों के आधार पर स्थापित किया गया था। इस मंच की स्थापना का उद्देश्य क्षेत्र में सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ाना है।

सार्क विरासत मंच क्या कार्य करेगा?

दक्षिण एशिया में पवित्र बौद्ध स्तूप, विशिष्ट हिंदू तीर्थस्थल, मुगल उद्यान, सांस्कृतिक स्थल, प्राचीन जलाशय और कई परंपराओं के सांस्कृतिक महत्व के स्थल हैं। यह मंच इन्हें साझा क्षेत्रीय विरासत के हिस्से के रूप में मान्यता देने और इनके प्रचार-प्रसार और आदान-प्रदान की दिशा में सामूहिक रूप से कार्य करेगा।

अंतर-सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देगा मंच

भगवान बुद्ध की जन्मस्थली होने के नाते, दक्षिण एशिया लाखों लोगों के लिए गहरा आध्यात्मिक महत्व रखता है। पूरे क्षेत्र में बौद्ध धर्म के प्रसार ने स्थायी स्मारकों और तीर्थस्थलों की विरासत छोड़ी है। यह मंच धार्मिक तीर्थयात्राओं को प्रोत्साहित करने और सार्क समुदायों के बीच अंतर-सांस्कृतिक समझ को बढ़ावा देने के लिए भी पहल शुरू करेगा।

सार्क विरासत मंच के प्रमुख उद्देश्य

  • वार्षिक सार्क की संरचना और कार्यान्वयन योजना को औपचारिक रूप देना।
  • सार्क विरासत सूची और संचालन संबंधी दिशानिर्देश जारी करना।
  • सार्क विरासत दिवस के प्रस्ताव को आगे बढ़ाना।
  • दक्षिण एशियाई क्षेत्र की साझा सांस्कृतिक संपत्तियों तक पहुंच के लिए ढांचे का विकास करना।

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