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दक्षिण कोरिया: किम योंग ह्युन का इस्तीफा, मार्शल लॉ लगाने की जिम्मेदारी ली, चोई ब्युंग ह्युक बने नए रक्षामंत्री

 Edited By: Shakti Singh
 Published : Dec 05, 2024 09:22 am IST,  Updated : Dec 05, 2024 09:22 am IST

मार्शल लॉ लगने के बाद कई नेताओं ने इसकी आलोचना की थी। राष्ट्रपति की पार्टी के नेता हैन डोंग-हून ने भी इस फैसले की खुलकर आलोचना की और संसद में हुए मतदान में भी हिस्सा लिया।

Choi Byung Hyuk- India TV Hindi
दक्षिण कोरिया के नए रक्षा मंत्री चोई ब्युंग ह्युक Image Source : AP

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक येओल ने गुरुवार को अपने रक्षा मंत्री का इस्तीफा स्वीकार कर लिया और नए रक्षा मंत्री की नियुक्ति भी कर दी है। चोई ब्युंग ह्युक को दक्षिण कोरिया का नया रक्षा मंत्री चुना गया है। देश के पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग ह्युन ने देश में मार्शल लॉ लगाने की जिम्मेदारी ली थी और अपने पद से इस्तीफा दिया था, जिसे अब स्वीकार कर लिया गया है।

राष्ट्रपति यून सुक येओल अपने रक्षा मंत्री का इस्तीफा स्वीकार करने लिए मजबूर थे, क्योंकि विपक्षी दलों ने ‘मार्शल लॉ’ लागू किए जाने के विरोध में दोनों के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव पेश किया था। मुख्य विपक्षी दल डेमोक्रेटिक पार्टी और अन्य छोटे विपक्षी दलों ने बुधवार को राष्ट्रपति यून सुक येओल के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया, जो पिछली रात उनके द्वारा घोषित ‘मार्शल लॉ’ के विरोध में पेश किया गया था। 

छह घंटे में हटा मार्शल लॉ

‘मार्शल लॉ’ लगभग छह घंटे तक प्रभावी रहा और ‘नेशनल असेंबली’ (दक्षिण कोरिया की संसद) ने राष्ट्रपति के फैसले को खारिज करने के पक्ष में तुरंत मतदान किया, जिससे उनके मंत्रिमंडल को बुधवार सुबह से पहले इसे हटाना पड़ा। राष्ट्रपति के कार्यालय ने बताया कि गुरुवार को यून ने रक्षा मंत्री किम योंग ह्युन के स्थान पर चोई ब्युंग ह्युक को नियुक्त किया, जो चार स्टार के साथ जनरल के पद से रिटायर हुए थे। वह फिलहाल सऊदी अरब में दक्षिण कोरिया के राजदूत हैं। यून की ओर से कोई और टिप्पणी नहीं की गई। उन्होंने टेलीविजन पर दिए गए अपने संबोधन में घोषणा की थी कि उनकी सरकार ‘मार्शल लॉ’ की घोषणा को हटा रही है, उसके बाद से वे किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नहीं दिखे हैं। 

सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों ने किया विरोध

देश में मार्शल लॉ लागू होने के बाद से ही सत्तारूढ़ और विपक्षी दल इसके विरोध में उतर आए थे। सत्तारूढ़ दल के कई नेताओं ने भी इसे अलोकतांत्रिक और असंवैधानकि बताया था। वहीं, राष्ट्रपति की पार्टी के नेता हैन डोंग-हून ने भी इस फैसले की खुलकर आलोचना की और संसद में हुए मतदान में भी हिस्सा लिया। मार्शल लॉ के फैसले के बाद देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो गए थे। (इनपुट-एपी)

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