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जंग की आहट! चीन ने उठाया बड़ा कदम, जानें ताइवान के पास आखिर कर क्या रहा है 'ड्रैगन'

 Edited By: Amit Mishra
 Published : Mar 18, 2025 02:46 pm IST,  Updated : Mar 18, 2025 02:46 pm IST

चीन ताइवान को अपना क्षेत्र मानता है और उसने अपनी सैन्य गतिविधियों को इस इलाके में बढ़ाया है। अब ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि 59 विमानों के साथ-साथ 9 चीनी युद्धपोत उसके इलाके के पास देखे गए हैं।

ताइवान के पास चीन का सैन्य अभ्यास - India TV Hindi
ताइवान के पास चीन का सैन्य अभ्यास Image Source : AP

China Taiwan Tension: चीन ताइवान को लेकर लगातार आक्रामक नजर आ रहा है। चीन ने हाल के दिनों में ताइवान के पास लगातार सैन्य अभ्यास किए हैं अब ताइवान की ओर से मंगलवार को कहा गया है कि उसके द्वीप के पास 59 चीनी विमान और युद्धपोत पहुंच गए हैं। पिछले साल अक्टूबर के बाद यह पहली बार हुआ है जब चीन ने इतनी बड़ी संख्या में जंगी जहाज ताइवान की ओर भेजे हैं। चीन का दावा है कि ताइवान उसका हिस्सा है और वह द्वीप को अपने नियंत्रण में लेगा, चाहे उसके लिए बल का इस्तेमाल ही क्यों ना करना पड़े।

ताइवान के आसपास क्या हो रहा है?

चीन ने हाल के वर्षों में ताइवान के आसपास लड़ाकू विमानों और नौसैनिक जहाजों की तैनाती बढ़ा दी है। इसे ताइवान पर दबाव बनाने के रणनीति के तौर पर देखा जाता रहा है। ताइवान का यह भी आरोप है कि चीन जासूसी, साइबर हमलों और गलत जानकारी के इस्तेमाल से उसकी रक्षा को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि 59 विमानों के साथ-साथ 9 चीनी युद्धपोत और 2 गुब्बारे भी 24 घंटे के दौरान देखे गए हैं।

ताइवान के पास चीन का सैन्य अभ्यास
Image Source : APताइवान के पास चीन का सैन्य अभ्यास

ताइवान के राष्ट्रपति का बड़ा बयान

बता दें कि, हाल ही में  ताइवान के राष्ट्रपति विलियम लाई चिंग-ते ने बड़ा बयान दिया था।  राष्ट्रपति ने कहा था कि चीनी घुसपैठ, जासूसी और द्वीप की रक्षा को कमजोर करने के अन्य प्रयासों से निपटने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है। लाई ने चीन से जुड़ी हाल की कई घटनाओं का हवाला दिया था जो संघर्ष से इतर मनोवैज्ञानिक युद्ध के दायरे में आती हैं। 

यह भी जानें

चीन नियमित रूप से द्वीप के निकट हवाई क्षेत्र और जलक्षेत्र में जहाज और विमान भेजता रहता है, ताकि वो वहां के 2 करोड़ 30 लाख लोगों को भयभीत कर सके और सशस्त्र बलों के मनोबल को कमजोर कर सके। ताइवान छोटा होने के बावजूद चीन से भिड़ने की ताकत रखता है, क्योंकि उसके पीछे अमेरिका खड़ा है। अमेरिका ताइवान को कूटनीतिक रूप से मान्यता नहीं देता, लेकिन वह उसकी सुरक्षा के लिए समर्थन दिखाता है।

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