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ईरान और अमेरिका के बीच क्यों हो रही है सीजफायर वार्ता में देरी, सामने आई वजह

 Published : Apr 22, 2026 04:23 pm IST,  Updated : Apr 22, 2026 04:23 pm IST

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम फिलहाल बढ़ गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह फैसला बिना वार्ता के एकतरफा लिया है। चलिए अब ऐसे में जानते हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर वार्ता में देरी की मुख्य वजह क्या हो सकती है।

Iran New Supreme Leader Mojtaba Khamenei Poster- India TV Hindi
Iran New Supreme Leader Mojtaba Khamenei Poster Image Source : AP

वॉशिंगटन: मुज्तबा खामेनेई को उनके पिता की हत्या के बाद ईरान का नया सर्वोच्च नेता घोषित हुए काफी समय बीत गया है। इस बीच अभी तक ईरानियों ने ना तो देखा है और ना ही सीधे तौर पर उनका कोई संबोधन सुना है। ऐसे में अब अमेरिकी अधिकारियों का मानना ​​है कि हत्या की धमकियों के बीच मुज्तबा का सामने ना आना वार्ता में देरी की एक वजह हो सकती हैं।

ईरानी नेतृत्व में आई दरार

ट्रंप के शीर्ष सहयोगियों के हवाले से CNN ने बताया कि व्हाइट हाउस का मानना ​​है कि खामेनेई के सक्रिय फैसला लेने की प्रक्रिया से अनुपस्थित रहने के कारण, मौजूदा ईरानी नेतृत्व में दरारें पड़ गई हैं। नेताओं के बीच अपनी स्थिति को लेकर या तेहरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य से जुड़े फैसलों पर वार्ताकारों को कितनी शक्ति दी जाए, इस पर कोई स्पष्ट सहमति नहीं है।

जानें क्या है शांति वार्ता में सबसे बड़ी बाधा?

माना जाता है कि ईरान के पास अब भी अनुमानित 440 किलोग्राम एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है। यही एनरिच्ड यूरेनियम शांति वार्ता में एक बड़ी बाधा बना हुआ है। ट्रंप की टीम का मानना ​​है कि मुज्तबा खामेनेई इस वक्त अपने अधीनस्थों को क्या निर्देश दे रहे हैं इसे बारे में बस अंदाजा ही लगाया जा सकता है। इन सबके बीच एक अधिकारी ने CNN को बताया कि अभी भी इस बात की संभावना है कि अमेरिका और ईरान जल्द ही बातचीत की मेज पर लौटेंगे। लेकिन, ऐसा कब और कैसे होगा इस बारे में अभी कुछ भी निश्चित नहीं है।

क्या मुज्तबा किसी प्रक्रिया में शामिल हैं?

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप में ईरान प्रोजेक्ट के निदेशक अली वाएज ने CNN को बताया कि ऐसा लगता है कि मुज्तबा ऐसी स्थिति में नहीं हैं जहां वो वास्तव में कोई महत्वपूर्ण फैसला ले सकते हैं या वार्ता को बारीकी से नियंत्रित कर सकते हैं। हालांकि, उनका मानना ​​है कि मौजूदा व्यवस्था उनका इस्तेमाल बड़े और मुख्य फैसलों के लिए अंतिम मंजूरी लेने के लिए कर रही है ना कि वार्ता की रणनीतियों के लिए। वाएज ने कहा, " इस व्यवस्था से मुज्तबा को एक सुरक्षा कवच मिल जाता है जो उनके पिता से विपरीत है। अली खामेनेई नियमित रूप से सामने आते थे और संबोधन देते थे।'' उन्होंने यह भी कहा कि मुज्तबा इस प्रक्रिया से नदारद हैं इसलिए उनके नाम पर विचार थोपना ईरानी वार्ताकारों के लिए आलोचना से बचने का एक अच्छा बहाना भी है।

मुज्तबा खामेनेई कहां हैं?

जंग शुरू होने के बाद से ही मुज्तबा खामेनेई पूरी तरह से गायब रहे हैं। ऐसा लगता है कि जंग ने उस इस्लामी शासन के लिए अस्तित्व का संकट खड़ा कर दिया है जिसने लगभग आधी सदी तक तेहरान पर राज किया है। इसके बजाय मुज्तबा के नाम से जारी बयान राष्ट्रीय टेलीविजन पर पढ़े गए हैं या सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए हैं। इस्लामी शासन ने संदेश देने के लिए खामेनेई के AI जनरेटेड वीडियो का भी इस्तेमाल किया है, जिससे यह अटकलें तेज हो गई हैं कि या तो वो किसी शारीरिक अक्षमता से जूझ रहे हैं या फिर विदेश में हैं। नए सुप्रीम लीडर की यह अनुपस्थिति उनके पिता, दिवंगत अयातुल्ला अली खामेनेई के बिल्कुल विपरीत है। अली खामेनेई दशकों तक ईरान के फैसले लेने की प्रक्रिया का चेहरा बने रहे थे। 

हमले में घायल हुए मुज्तबा

पिछले महीने, CNN ने रिपोर्ट दी थी कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हमलों में मुज्तबा खामेनेई घायल हो गए थे। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ सैन्य और सुरक्षा अधिकारी मारे गए थे। अमेरिका और इजरायल का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह नष्ट करना, उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को खत्म करना था।

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