नई दिल्ली: इंडिया टीवी के लोकप्रिय शो "कॉफी पर कुरुक्षेत्र" में बुधवार (17 जून) को इस मुद्दे पर चर्चा हुई कि फ्रांस में आयोजित G-7 मीटिंग में एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच द्विपक्षीय मुलाकात हुई और दूसरी तरफ पिछले कई महीने से मध्य-पूर्व में जारी तनाव की वजह से वैश्विक परिस्थितियां काफी बदल चुकी हैं। चर्चा में शो के एंकर और इंडिया टीवी के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर सौरव शर्मा और इंडिया टीवी के पॉलिटिकल एडिटर देवेंद्र पराशर के साथ मेहमान के तौर पर प्रदीप सिंह और एमजे अकबर मौजूद रहे।
भारत-अमेरिका संबंधों को नए संदर्भ में देखने की जरूरत
कार्यक्रम में बात हुई कि फ्रांस में आयोजित G-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात के बाद भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर नई बहस छिड़ गई। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ महीनों में वैश्विक परिस्थितियां इतनी तेजी से बदली हैं कि दोनों देशों के रिश्तों को नए संदर्भ में देखने की जरूरत है।
रिश्तों की वास्तविकता समझते हुए भारत बना रहा विदेश नीति
विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ईरान संकट और ट्रंप प्रशासन की बदली हुई विदेश नीति ने पूरी वैश्विक रणनीतिक तस्वीर को प्रभावित किया है। अमेरिका की तरफ से हाल के महीनों में पाकिस्तान के साथ बढ़ी सक्रियता और पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व को मिले महत्व ने भारत में भी कई सवाल खड़े किए हैं। विश्लेषकों ने कहा कि भारत लंबे समय से अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों की वास्तविकता को समझते हुए अपनी विदेश नीति तैयार करता रहा है, लेकिन हालिया घटनाक्रमों ने नई चिंताएं पैदा की हैं।
"इंडो-पैसिफिक" को लेकर अमेरिका ने अपनाया नया रुख
चर्चा का एक बड़ा विषय अमेरिका की तरफ से "इंडो-पैसिफिक" अवधारणा को लेकर अपनाया गया नया रुख भी है। रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले एक दशक में भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी भूमिका को काफी मजबूत किया है। अमेरिका ने भी इस बढ़ती भूमिका को स्वीकार करते हुए इंडो-पैसिफिक रणनीति को बढ़ावा दिया था।
भारत की रणनीतिक स्थिति पहले से हुई मजबूत
जानकार मानते हैं कि भारत की रणनीतिक स्थिति पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हो चुकी है। भारत अब केवल दक्षिण एशिया तक सीमित शक्ति नहीं रहा, बल्कि अदन की खाड़ी से लेकर मलक्का जलडमरूमध्य तक उसकी सुरक्षा और रणनीतिक उपस्थिति बढ़ी है। ऐसे में किसी एक देश के फैसले से भारत की स्थिति कमजोर नहीं होगी।
चीन के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए भारत की जरूरत
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि आज की दुनिया बहुध्रुवीय हो चुकी है और अमेरिका को भी एशिया में चीन के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए भारत की जरूरत है। वहीं, भारत भी अमेरिका के साथ मजबूत संबंध बनाए रखना चाहता है, लेकिन अपनी शर्तों और राष्ट्रीय हितों के आधार पर।
वैश्विक शक्ति-संतुलन की दिशा तय करने के लिए अहम बैठक
ऐसे माहौल में मोदी-ट्रंप मुलाकात को केवल द्विपक्षीय बैठक नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक शक्ति-संतुलन की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग पर आगे क्या दिशा तय होती है, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
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(डिस्क्लेमरः यह आर्टिकल कार्यक्रम में हुई चर्चा पर आधारित है और कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए गए विचार मेहमानों के निजी विचार हैं।)