वाशिंगटन: पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या ने सऊदी अरब के युवराज को अमेरिका की नजर में साझेदार से एक बोझ बना दिया है। सत्ता पर पकड़ मजबूत करने के, सऊदी अरब के वली अहद मोहम्मद बिन सलमान के प्रयासों का कभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनालड ट्रंप ने उत्साहपूर्वक समर्थन किया था। ट्रम्प के दामाद और सलाहकार जेरेड कुशनर (33) के साथ मोहम्मद बिन सलमान के घनिष्ठ संबंध रहे हैं लेकिन अमेरिका में रह रहे पत्रकार और सऊदी अरब के वली अहद के आलोचक जमाल खशोगी की तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में स्थित सऊदी अरब के दूतावास में हुई मौत ने हालात बदल दिए।
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अमेरिकी राष्ट्रपति इस घटना को लेकर सऊदी अरब की खामोशी और फिर खशोगी की मौत की स्वीकारोक्ति के बाद खुद को छला हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने खशोगी मामले में शामिल रहे सऊदी अरब के लोगों के वीजा पर प्रतिबंध के लिए शुरूआती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।
चौतरफा घिरने के बाद आखिरकार सऊदी अरब ने स्वीकार कर लिया कि खशोगी की हत्या इस्तांबुल स्थित उसके वाणिज्य दूतावास के अंदर की गई थी। द वॉल स्ट्रीट जर्नल में बुधवार को ट्रंप का एक साक्षात्कार प्रकाशित हुआ है।
इस साक्षात्कार में ट्रंप ने घटनाक्रम को लेकर सऊदी अरब के शाह 82 वर्षीय सलमान को आरोपों से बचाने की कोशिश की लेकिन मोहम्मद बिन सलमान को लेकर उनका रूख ऐसा कतई नहीं था। ट्रंप ने कहा ‘‘युवराज बहुत कुछ कर रहे हैं और अगर घेरे में कोई आता है तो यह शख्सियत वह होंगे।’’ बहरहाल, ट्रंप ने व्यापार के आधार पर सऊदी अरब को हथियारों की बिक्री का बचाव भी किया।