वॉशिंगटन: राजनीतिज्ञों की टिप्पणियों की सच्चाई का पता लगाने वाली एक वेबसाइट 'पॉलिटी फैक्ट' ने राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी के लिए रिपब्लिकन दावेदार डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों के कारण उन्हें '2015 लाई ऑफ द ईयर' अवार्ड दिया है। वेबसाइट ने पिछले वर्ष जून में ट्रंप द्वारा राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी की दौड़ में शामिल होने की घोषणा करने के बाद से अब तक की उनकी 77 टिप्पणियों को परखा है।
समाचार एजेंसी एफे के मुताबिक, पॉलिटी फैक्ट के 'ट्रथ-ओ-मीटर' में ट्रंप की 77 टिप्पणियों में से 76 को झूठ या लगभग झूठ पाया गया है। जांची गई टिप्पणियों में उनका यह दावा कि 'मेक्सिको की सरकार खराब लोगों को अमेरिका भेज देती है' भी शामिल था।
जनमत सर्वेक्षणों में राष्ट्रपति उम्मीदवार की दौड़ में सबसे आगे चल रहे ट्रंप ने राष्ट्रपति की उम्मीदवारी घोषित करने के दौरान दिए भाषण में गैर दस्तावेजी मेक्सिको के प्रवासियों को बलात्कारी और अपराधी कहा था, जिसके कारण काफी विवाद उत्पन्न हो गया था।
वेबसाइट ने कहा, "इस बात का कोई सबूत नहीं है कि मेक्सिको सरकार अपराधियों को सीमा पार भेजती है। अधिकांश अवैध प्रवासी काम की तलाश में आते हैं।" वेबसाइट ने यह पुरस्कार सोमवार को घोषित किया। फ्लोरिडा युनिवर्सिटी में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर माइकल ला बोसियेरे ने कहा, "ट्रंप बिल्कुल झूठे बल्कि मूर्खतापूर्ण झूठे दावे करते हैं, जिससे वह मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींचते हैं।"
ट्रंप को वर्ष के सबसे बड़े झूठे व्यक्ति का पुरस्कार दिलाने वाली उनकी एक अन्य टिप्पणी है कि उन्होंने "हजारों लोगों को 9/11 हमलों और न्यूजर्सी में ट्विन टॉवर ध्वस्त होने की खुशी मनाते देखा।" यह एक ऐसा दावा है जिसकी सच्चाई वह कभी साबित नहीं कर पाए। इसके अलावा ट्रंप की इस टिप्पणी को भी गलत पाया गया कि ऐसे श्वेत जिनकी हत्या की जाती है, उनमें से 81 प्रतिशत अश्वेत हत्यारों द्वारा मारे जाते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि 2014 में यह आंकड़ा 15 फीसदी था। पॉलिटी फैक्ट के मुताबिक, ट्रम्प अपने अभियान के लिए अचल संपत्ति की सौदेबाजी और अपने टीवी रियलिटी शो 'द एप्रेंटिस' में इस्तेमाल की गई अपनी नीति 'सच्ची अतिशयोक्ति' की तकनीक इस्तेमाल कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि ट्रंप ने 1987 की अपनी किताब 'द आर्ट ऑफ द डील' में इसी तकनीक का जिक्र करते हुए लिखा था, "लोग मानना चाहते हैं कि कोई चीज सबसे बड़ी, सर्वश्रेष्ठ और सबसे अद्भुत है। मैं इसे 'सच्ची अतिशयोक्ति' कहता हूं। यह किसी बात को मासूमियत से बढ़ा-चढ़ा कर कहने की कला है और तरक्की के लिए बेहद प्रभावशाली नीति है।"