संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मिस्र, जापान, सेनेगल, यूक्रेन और उरग्वे को दो वर्ष के लिए सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य चुना है। दो वर्ष की यह अवधि अगले साल एक जनवरी से शुरू होगी। नए सदस्यों को कल यहां मतदान में चुना गया। वे 31 दिसंबर 2017 तक अपनी सेवाएं देंगे। क्षेत्रीय रूप से बांटी गई जिन पांचों सीटों के लिए 2015 में चुनाव होना था, उनमें से दो सीटें अफ्रीकी समूह मौजूदा समय में चाड और नाइजीरिया के पास, एक सीट एशिया प्रशांत समूह मौजूदा समय में जॉर्डन के पास , एक सीट लातिन अमेरिकी और कैरेबियाई देशों के समूह के लिए मौजूदा समय में चिली के पास और एक सीट पूर्वी यूरोपीय समूह मौजूदा समय में लिथुआनिया के पास के लिए हैं।
इस वर्ष पश्चिमी यूरोपीय एवं अन्य समूह किसी सीट पर नहीं लड़ रहे हैं क्योंकि इसकी दो सीटों पर हर सम कलैंडर (इवन कैलेंडर)वर्ष में चुनाव होता है। ये सीटें मौजूदा समय में न्यूजीलैंड और स्पेन के पास हैं। सुरक्षा परिषद में वीटो का अधिकार रखने वाले पांच स्थायी सदस्य चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका हैं। वर्ष 2016 के अंत तक परिषद में रहने वाले अस्थायी सदस्य अंगोला, मलेशिया, न्यूजीलैंड, स्पेन और वेनेजुएला हैं।
भारत सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए दबाव बना रहे विकासशील देशों का नेतृत्व कर रहा है ताकि इसमें अधिक देशों का प्रतिनिधित्व बढ सके और यह 21वीं सदी की वास्तविकताओं के अनुरूप बन सके। 193 सदस्यीय महासभा ने पिछले महीने सर्वसम्मति से दस्तावेज के आधार पर सुरक्षा परिषद सुधार पर संयुक्त राष्ट्र महासभा के 70वें सत्र में वार्ता शुरू करने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें सुधार के बाद परिषद में वीटो के इस्तेमाल और स्थायी एवं अस्थायी सीटों की संख्या बढाने के संबंध में विभिन्न देशों के रख शामिल होंगे।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने की प्राथमिक जिम्मेदारी सुरक्षा परिषद की है। परिषद के हर सदस्य के पास एक वोट होता है। चार्टर के तहत संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देश परिषद का आदेश मानने के लिए बाध्य हैं। सुरक्षा परिषद शांति को खतरे एवं आक्रामकता की मौजूदगी निर्धारित करने में आगे रहती है। यह सभी पक्षों से शांतिपूर्ण तरीके से विवाद सुलझाने की अपील करती है और सुलह की पद्धतियों के बारे में सलाह देती है। कुछ मामलों में सुरक्षा परिषद प्रतिबंध भी लगाती है या अंतररष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने या स्थापित करने के लिए बल प्रयोग का भी अधिकार देती है। यह महासभा को महासचिव की नियुक्ति और संयुक्त राष्ट्र में नए सदस्यों को जोड़ने के संबंध में भी सलाह देती हैं और महासभा के साथ मिलकर इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिज के जज का चयन करती है।