वाशिंगटन : पेरिस जलवायु समझौता का इस साल भारत का अनुमोदन मिल जाने के अमेरिका के दावे का आज भारतीय आधिकारिक सूत्रों ने खंडन किया।
हस्ताक्षर के लिए कोई तय समय सीमा नहीं
इस पर हस्ताक्षर करने के लिए भारत द्वारा कोई समय सीमा तय नहीं किए जाने का संकेत देते हुए सूत्रों ने बताया, हम यथाशीघ्र इसमें शामिल होने के लिए सहमत हुए और यही चीज संयुक्त बयान में भी जाहिर हुआ है।
क्या कहा था पीएम मोदी ने
यहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की राष्ट्रपति बराक ओबामा से वार्ता होने के बाद अमेरिका ने कहा था कि भारत ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन सीमित करने के लिए ऐतिहासिक समझौते पर इस साल हस्ताक्षर करने की कोशिश करेगा।
55 देशों का औपचारिक रूप से शामिल होना है जरूरी
वैश्विक उत्सर्जन का 55 फीसदी प्रतिनिधित्व करने वाले कम से कम 55 देशों के औपचारिक रूप से शामिल होने पर यह समझौता बाध्यकारी हो जाएगा।
भारत का समझौते पर हस्ताक्षर करना आखिर क्यों है खास
भारत का हस्ताक्षर काफी मायने रखता है क्योंकि यह इस बात की गारंटी देता है कि यह समझौता अगले अमेरिकी राष्ट्रपति के जनवरी में पदभार संभालने से प्रभावी हो जाएगा जबकि रिपब्लिकन पार्टी से संभावित उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रम्प इस पर फिर से बात करने की धमकी दे रहे हैं।
पेरिस समझौते पर आखिर क्या कहता है संयुक्त बयान
संयुक्त बयान में कहा गया है कि भारत और अमेरिका, दोनों ही देश जलवायु परिवर्तन की तात्कालिकता को मान्यता देते हैं और यथाशीघ्र पेरिस समझौते के प्रभावी होने के लक्ष्य को साझा करते हैं। विदेश सचिव एस जयशंकर ने कल कहा कि विनियामक और कानूनों मुद्दों का हल करना होगा और भारत सरकार समझौते पर आगे बढ़ने के लिए तौर तरीकों पर गौर कर रही है।